शेयर मंथन में खोजें

नयी ऊँचाई छूने के बाद 2,132 अंक फिसला सेंसेक्स (Sensex)

कोरोना से संबंधित नयी चिन्ताएँ उभरने के कारण कारोबारी हफ्ते के पहले दिन सोमवार को भारतीय बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गयी।

अपने पिछले बंद स्तर 46,960.69 के मुकाबले बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) सोमवार को मामूली कमजोरी के साथ 46,932.18 पर खुला, लेकिन जल्दी ही यह ऊपर की ओर 47,055.69 तक उछल गया, जो इसका सर्वकालिक उच्चतम स्तर है। हालाँकि दोपहर तक यह लगभग सपाट रहा और लाल-हरे निशान के बीच झूलता रहा। लेकिन कोरोना के नये रूप में आने के कारण यूरोप के विभिन्न हिस्सों में लॉकडाउन फिर से लगाये जाने की खबरों के बीच दोपहर बाद सेंसेक्स तेजी से फिसलने लगा और नीचे की ओर 44,923.08 तक लुढ़क गया। इस तरह यह दिन के ऊपरी स्तर से 2,132 अंक फिसल चुका था। हालाँकि निचले स्तर पर थोड़ी खरीदारी आने के कारण यह कल 1,406.73 अंकों या 3.00% की भारी गिरावट के साथ 45,553.96 पर बंद हुआ। सोमवार को सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। कल ओएनजीसी (ONGC) में 9.15%, इंडसइंड बैंक (Indusind Bank) में 6.98%, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (M&M) में 6.26% और एसबीआई (SBI) में 6.19% की कमजोरी दर्ज की गयी।
दूसरी ओर एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) सोमवार को 432.15 अंकों या 3.14% की भारी गिरावट के साथ 13,328.40 पर बंद हुआ। हालाँकि इससे पहले कल सुबह के कारोबार में यह ऊपर की ओर 13,777.50 तक उछल गया था, जो इसका सर्वकालिक उच्चतम स्तर है। कल निफ्टी के सभी 50 शेयर कमजोरी के साथ बंद हुए। (शेयर मंथन, 22 दिसंबर 2020)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख