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साप्ताहिक निपटान के दिन बाजार उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट के साथ बंद

वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत देखने को मिले। अमेरिका में महंगाई दर 41 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया। जून महीने में महंगाई दर 9.1% पर पहुंच गया जबकि अनुमान 8.8% का था।

साप्ताहिक निपटान के दिन बाजार उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट के साथ बंद

वैश्विक बाजारों से अच्छे संकेत देखने को मिले। डाओ 270 अंक बढ़कर दिन की ऊंचाई पर बंद हुआ। नैस्डैक में लगातार चौथे दिन तेजी देखी गई और 1.75% बढ़त के साथ बंद हुआ। यूरोप के बाजारों में 1% तक की तेजी रही।

साप्ताहिक निपटान के दिन बाजार उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद

वैश्विक बाजारों से अच्छे संकेत देखने को मिले। अमेरिकी बाजारों में निचले स्तरों से शानदार सुधार देखा गया।डाओ नीचे से 300 अंक उछलकर दिन की ऊंचाई पर बंद हुआ। नैस्डैक में लगातार तीसरे दिन उछाल रहा और 1% ऊपर बंद हुआ।

साप्ताहिक निपटान के दिन बाजार उतार-चढ़ाव के बीच मामूली गिरावट पर बंद

 वैश्विक बाजारों से से स्थिर संकेत देखने को मिले। अमेरिकी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच मिलाजुला कारोबार देखा गया। 550 अंकों के दायरे में डाओ जोंस पर कारोबार हुआ और आखिर में 30 अंक गिरकर बंद हुआ।डाओ जोंस में निचले स्तर से 300 अंकों का सुधार देखने को मिला। IT में दमदार तेजी से नैस्डैक में 1% का उछाल देखा गया।

साप्ताहिक निपटान के दिन बाजार उतार-चढ़ाव के बीच सपाट बंद

 वैश्विक बाजारों से एक बार फिर सुस्त संकेत देखने को मिले। अमेरिकी बाजार में सीमित दायरे में मिलाजुला कारोबार देखा गया। डाओ जोंस पर 150 अंकों के दायरे में कारोबार हुआ और आखिर में 80 अंक फिसलकर बंद हुआ। नतीजों के दम पर नैस्डैक में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निचले स्तर से नैस्डैक 100 अंक सुधरकर सपाट बंद हुआ।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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