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साप्ताहिक निपटान से पहले बाजार में शानदार तेजी, सेंसेक्स 351, निफ्टी 98 अंक चढ़ कर बंद

वैश्विक बाजारों से अच्छे संकेत देखने को मिले। डाओ की तेजी बरकरार रही और लगातार 12वें दिन बढ़त पर बंद हुआ। कल 150 अंकों के छोटे दायरे में कारोबार के बीच डाओ जोंस 27 अंक चढ़कर बंद हुआ।

साप्ताहिक निपटान से पहले भारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार में सपाट कारोबार

वैश्विक बाजारों से सुस्त संकेत देखने को मिले। सोमवार को अमेरिकी बाजार में सपाट कारोबार के बाद कल गिरावट देखी गई।

साप्ताहिक निपटान, पॉलिसी के असर से बाजार गिरावट के साथ बंद

वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत देखने को मिले। डाओ जोंस 200 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं नैस्डैक में 160 अंकों की कमजोरी देखी गई। यूरोप के बाजारों में तेजी देखी गई।

साप्ताहिक निपटान से पहले सेंसेक्स 523, निफ्टी 160 अंक गिर कर बंद

 वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत देखने को मिले। अमेरिकी बाजारों में लगातार चार दिनों से चली आ रही गिरावट थमती दिखी। डाओ जोंस सोमवार को 200 अंक गिरने के बाद कल 200 अंक चढ़कर बंद हुआ।

साप्ताहिक निप्टान के दबाव से बिगड़ी बाजार की गति, 24500/80300 के स्तर तक कमजोर रह सकता है बाजार : श्रीकांत चौहान

कोटक सिक्योरिटीज (Kotak Securities) में इक्विटी रिसर्च के प्रमुख श्रीकांत चौहान के मुताबिक गुरुवार (07 नवंबर) को अमेरिका में फेड की बैठक से पहले बाजार में मंदी का रुख रहा। साथ ही, साप्ताहिक निप्टान के दबाव ने बाजार की गति को बिगाड़ दिया। तकनीकी रूप से, यह 24500/80300 के स्तर से ऊपर टिकने में विफल रहा, जो बाजार के लिए नकारात्मक हो गया और यह दिन के सबसे निचले स्तर 24200/79400 पर बंद हुआ।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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