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अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में तेजी से एशियाई बाजारों में बढ़त

सोमवार को अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में मजबूती दर्ज की गयी, जिसका सकारात्मक असर आज एशियाई बाजारों पर दिख रहा है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दरें घटाने से एशियाई बाजार में मजबूती

बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक के समापन पर इस साल तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती की।

अमेरिकी दरें बढ़ने की संभावना से बाजार सहमा, सेंसेक्स 26,000 के नीचे

बुधवार की हल्की गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी बढ़ गयी। दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से दिसंबर में ही ब्याज दरें बढ़ाये जाने के पुख्ता संकेत दिये जाने के बाद वैश्विक बाजारों में घबराहट दिखी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

अमेरिकी चुनाव के नतीजे देख खुशी से झूमे बाजार, फेड के फैसले पर नजर : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक बुधवार (06 नवंबर) को अमेरिकी चुनाव के नतीजे डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में आने से भारतीय शेयर बाजार उत्साहित दिखा और दूसरे दिन भी मजबूत बढ़त देखने को मिली। 

अमेरिकी फेड और खुदरा बिक्री आँकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक निफ्टी में तीव्र करेक्शन देखने को मिला, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस, भारती एयरटेल जैसे ब्लूचिप शेयरों में बिकवाली के दबाव के बीच ये 332 अंकों के नुकसान के साथ 24320 (1.35%) के स्तर पर बंद हुआ। 

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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