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जस्ट डायल के तिमाही नतीजे के बाद निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बिंदास जानना चाहते हैं कि उन्हें जस्ट डायल (Justdial) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने लगभग 900 रुपये के भाव पर खरीदा है। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि ताजा तिमाही नतीजों पर नज़र डालें तो कंपनी का प्रदर्शन बहुत ज़्यादा उत्साहजनक नहीं दिखता। बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 6% की ही बढ़त है, जो एक डिजिटल/आईटी-इनेबल्ड सर्विस कंपनी के लिहाज़ से काफ़ी कम मानी जाएगी। मार्जिन में हल्का सुधार ज़रूर है, उसी वजह से मुनाफ़े में थोड़ी स्थिरता दिखती है, लेकिन कुल मिलाकर बिजनेस ग्रोथ साफ तौर पर पीछे छूटती नजर आ रही है। क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर आंकड़ों को देखें तो तस्वीर और भी फ्लैट लगती है। सेल्स लगभग स्थिर हैं और मुनाफ़ा भी पिछली तिमाही की तुलना में खास बढ़त नहीं दिखा पा रहा। 119 करोड़ से घटकर 118 करोड़ के आसपास रहना यह संकेत देता है कि बिज़नेस में कुछ ऐसा है जो फिलहाल सही तरीके से काम नहीं कर रहा। कंपनी किसी तरह अपना बिज़नेस तो संभाले हुए है, लेकिन तेज ग्रोथ की कहानी फिलहाल नज़र नहीं आती।

इसी वजह से वैल्यूएशन को लेकर भी बहुत ज़्यादा कंफर्ट नहीं है। मौजूदा हालात में जस्ट डायल को लगभग 10 गुना वैल्यूएशन से ज़्यादा देना मुश्किल लगता है। अगर बाजार का माहौल बहुत मजबूत होता तो 20–30% का प्रीमियम मिल सकता था, लेकिन मौजूदा नतीजों के आधार पर उससे ज्यादा वैल्यूएशन जस्टिफाई करना कठिन है। यानी वैल्यूएशन पहले से ही सप्रेस्ड है, लेकिन इसमें ऊपर जाने की गुंजाइश भी सीमित दिखती है।

शेयर प्राइस के स्तर पर बात करें तो 750 रुपये एक अहम ज़ोन माना जा सकता है। अगर किसी वजह से शेयर 750 के ऊपर टिकता है, तो वहां से लगभग 10% तक की शॉर्ट कवरिंग या टेक्निकल मूव देखने को मिल सकती है। लेकिन यह सिर्फ एक सीमित उछाल होगी, कोई बड़ी ट्रेंड रिवर्सल नहीं। इसके नीचे रिस्क प्रोफाइल लगभग वैसा ही बना रहता है जैसा पहले था।

जो निवेशक 900 रुपये के भाव पर फंसे हुए हैं, उनके लिए फिलहाल बहुत बड़ी उम्मीदें बांधना ठीक नहीं होगा। बेहतर यही है कि या तो कंपनी के नतीजों में साफ सुधार दिखे या फिर बाजार का माहौल मजबूत हो। जब तक इनमें से कोई एक चीज नहीं होती, तब तक इस स्टॉक में बड़ी रिकवरी की उम्मीद करना मुश्किल है। धैर्य के साथ नतीजों और ग्रोथ ट्रेंड पर नजर रखना ही इस समय सबसे व्यावहारिक रणनीति लगती है।


(शेयर मंथन, 18 जनवरी 2026)

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