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आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट के बाद भी क्यों नहीं बन रहा निवेश का भरोसा?

आईटी सेक्टर इस समय बाजार का सबसे कमजोर पक्ष बना हुआ है। हाल के महीनों में इसमें काफी तेज गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या अब आईटी शेयर इतने सस्ते हो गए हैं कि खरीदे जाएं या फिर अभी भी इसमें जोखिम ज्यादा है।

क्या शीला फोम का खराब दौर खत्म हो रहा है या यह सिर्फ अस्थायी राहत है?

एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें शीला फोम (Sheela Foam) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

वेदांता शेयर 670 के पार पहुँचा, अब निवेशक मुनाफा निकालें या आगे की तेजी का इंतजार करें?

अश्विनी जानना चाहते हैं कि उन्हें वेदांता (Vedanta) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 227 रुपये पर खरीदा था और उनके पास 100 शेयर हैं। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

एक्सपर्ट से जानें मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में फिर कब आयेगी तेजी?

मिड और स्मॉल कैप शेयरों की मौजूदा स्थिति को लेकर बाजार में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। निवेशकों को मन में सवाल है कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में फिर कब आयेगी तेजी?

चाँदी में स्पेकुलेशन ज्यादा, मुनाफा कमाना मुश्किल, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

चाँदी की बात करें तो इसमें हालिया तेजी काफी हद तक स्पेकुलेशन से आयी हुई दिखती है। इस समय चाँदी की चाल को नजरअंदाज करना मुश्किल है। हाल के दिनों में इसमें जो जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिख रहा है।

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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