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जारी रहेगी एफआईआई की बिकवाली

avinnash gorakssakarअविनाश गोरक्षकर, सीआईओ, प्रिसीजन इन्वेस्टमेंट

वर्ष 2016 के उम्मीद भरा बने रहने की संभावना है लेकिन वैश्विक कारक बाजार की चाल को बदलते रहेंगे। हमारा अनुमान है कि 2016 में भी विदेशी संस्थागत निवेशक लंबे समय तक शुद्ध बिकवाल बने रहेंगे।

फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में बढ़ोतरी अल्पकाल में नकारात्मक असर डालेगी, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते दीर्घकाल में यह सकारात्मक असर डालेगी। डॉलर का मजबूत होना और रुपये का कमजोर होना, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी और कमजोर कॉर्पोरेट नतीजे चिंता की वजह बने हुए हैं। (शेयर मंथन, 08 जनवरी 2016)

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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