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वैश्विक बाजारों की चाल को लेकर चिंता

vinay gupta trustlineविनय गुप्ता, निदेशक, ट्रस्टलाइन सिक्योरिटीज

मैं भारत के बारे में बहुत नकारात्मक नहीं हूँ, फिर भी वैश्विक बाजारों, खास कर चीन और यूरो जोन में गड़बड़ी आने से भारत पर भी असर पड़ेगा।

अन्य विकासशील देशों के मुकाबले भारत में प्रमुख आर्थिक कारक बहुत बेहतर हैं। कच्चे तेल की कीमत नयी तहलटी तक गिर गयी हैं, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति अतिरेक के बीच चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण कमजोर माँग के प्रति निवेशकों की चिंता बनी हुई है। (शेयर मंथन, 8 जनवरी, 2016)

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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