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बाजार की परिस्थितियाँ अगले छह महीनों में चुनौतीपूर्ण, घरेलू खपत से उम्मीद

पंकज जैन

निदेशक, एसडब्ल्यू कैपिटल

मेरा मानना है कि अगले 6 महीनों में भारतीय शेयर बाजार के लिए परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण रहेंगी। इन 6 महीनों में अमेरिकी व्यापार समझौता, खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और मानसून भारतीय बाजार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।

इनके साथ ही, कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत की जीडीपी वृद्धि दर, तिमाही नतीजे तथा महँगाई एवं ब्याज दरों पर सबसे अधिक नजर रहेगी। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता होने की उम्मीद भी नहीं लग रही है। 

मुझे उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अगले तीन महीनों के भीतर हो सकता है। यदि अगले 3–6 महीनों में यह समझौता हो जाता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर पड़ेगा। रुपये की स्थिति देखें तो अगले 6 महीनों में 1 डॉलर की कीमत 91–95 रुपये के दायरे में रह सकती है। 

इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, भूराजनीतिक परिस्थितियाँ और घरेलू खपत सकारात्मक कारक हैं। दूसरी ओर, कमजोर मानसून और एफआईआई की लगातार बिकवाली बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताएँ हैं। मुझे उम्मीद है कि एफपीआई 2027 में भारतीय शेयर बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बन सकते हैं। 

अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के अनुरूप रहने की संभावना दिखती है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में 10–20% की वृद्धि होगी। अनुमान है कि 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7% और 2027-28 में 8% रह सकती है।

मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 81,500 और निफ्टी को 25,500 के स्तर पर देखता हूँ। अगले 12 महीनों में, यानी जून 2027 तक, सेंसेक्स के लिए मेरा लक्ष्य 83,000 और निफ्टी के लिए 26,000 है। सेंसेक्स को 1 लाख के स्तर तक पहुँचने में वर्ष 2030 तक का समय लग सकता है।

अगले 12 महीनों में ऑटो, ऑटो एंसिलरी, फार्मा और एनर्जी इक्विपमेंट क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि एफएमसीजी, रियल एस्टेट और सरकारी बैंकों के शेयर कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। मेरी पसंद के सबसे प्रमुख शेयरों में बजाज फाइनेंस, मारुति, कमिंस, ल्यूपिन और अपोलो हॉस्पिटल शामिल हैं।

(शेयर मंथन, 20 जुलाई 2026)

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