नितिन रहेजा
हेड - डिस्क्रीशनरी मैनेजमेंट, ज्यूलियस बेयर इंडिया
निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार का मूल्यांकन तेजी की संभावनाओं को सीमित कर सकता है। हालाँकि, लंबी अवधि में बाजार का परिदृश्य बहुत सकारात्मक है।
मैं वर्ष 2026 के अंत तक सेंसेक्स 83,300 और निफ्टी 26,000 के स्तर पर पहुँचने की आशा रखता हूँ। वहीं 12 महीनों में, यानी जून 2027 तक, सेंसेक्स के लिए मेरा लक्ष्य 89,700 और निफ्टी के लिए 28,000 है। पर सेंसेक्स के 1 लाख तक पहुँचने में समय लगेगा, संभवतः वर्ष 2030 तक ऐसा हो सकेगा।
अगले 6 महीनों में अमेरिका-ईरान युद्ध और भूराजनीति, कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत की जीडीपी वृद्धि दर तथा तिमाही नतीजे भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। इन 6 महीनों में भारतीय बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक कॉर्पोरेट आय में वृद्धि (अर्निंग ग्रोथ) को माना जा सकता है।
मुझे उम्मीद है कि 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि 0–10% के बीच रहेगी। भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2026-27 में 6.5% और 2027-28 में 7% रह सकती है। निफ्टी की अनुमानित ईपीएस 2026-27 के लिए 1,225 रुपये और 2027-28 के लिए 1,425 रुपये है।
अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत और भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता होगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। वहीं भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कैलेंडर वर्ष 2027 में किसी समय हो सकता है। यदि अगले 3–6 महीनों में यह समझौता हो जाता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
वैश्विक और घरेलू ब्याज दरों का बाजार पर हल्का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अगले 6 महीनों में डॉलर की कीमत 91–95 रुपये के दायरे में रह सकती है। वैश्विक एआई बुलबुला अभी नहीं फूटा है, हालाँकि जब यह बुलबुला फूटेगा तो इसका भारतीय शेयर बाजार पर सकारात्मक असर होगा। मुझे उम्मीद है कि एफपीआई वर्ष के उत्तरार्ध में भारतीय शेयर बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बन सकते हैं।
इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए कम कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट सबसे बड़ी सकारात्मक बातें हैं। दूसरी ओर, भारतीय बाजार में एआई से जुड़े अवसरों का अभाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख नकारात्मक कारक हैं। अगले 12 महीनों में मेरा मानना है कि भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। बैंकिंग और इंडस्ट्रियल्स क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि आईटी क्षेत्र कमजोर रह सकता है।
(शेयर मंथन, 20 जुलाई 2026)