विवेक कुमार नेगी
सीओओ, इन्वेस्ट राइट कैट-3 एआईएफ
भारतीय शेयर बाजार की बुनियाद मजबूत है और घरेलू माँग तथा कच्चे तेल की कम कीमतें बाजार के लिए सकारात्मक हैं।
हालाँकि, रुपये में कमजोरी और वैश्विक परिस्थितियाँ प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। इसलिए हम बाजार को लेकर सतर्क हैं और व्यापार समझौता, अमेरिका-ईरान युद्ध के संभावित समाधान, महँगाई एवं ब्याज दर परिदृश्य जैसे घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं। अगले 6 महीनों में बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के तिमाही नतीजे सबसे महत्वपूर्ण कारकों में रहेंगे। ब्याज दरों के वैश्विक और घरेलू परिदृश्य का बाजार पर तटस्थ प्रभाव रहने की उम्मीद है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारतीय बाजार पर अब तक हल्का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वहीं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उम्मीद है कि यह दिसंबर 2026 तक हो सकता है। इससे भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर पड़ेगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के 2027 तक भारतीय बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बनने की उम्मीद है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी वैश्विक तेजी के बुलबुले के बारे में अभी कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यह बुलबुला लंबे समय तक बना रह सकता है।
दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स 95,000 और निफ्टी 29,000 के स्तर तक पहुँच सकते हैं। अगले 12 महीनों के लिए सेंसेक्स का लक्ष्य 99,000 और निफ्टी का लक्ष्य 31,000 का बन रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 1,280 रुपये और 2027-28 में 1,400 रुपये रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनियों की आय में 0-10% की वृद्धि की उम्मीद है। वहीं भारत की विकास दर (जीडीपी वृद्धि) 2026-27 में 6.75% और 2027-28 में 7.8% रह सकती है।
अगले 12 महीनों में मेरा मानना है कि भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। बैंकिंग एवं वित्त, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और उपभोग (कंजंप्शन) से जुड़े क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि दवा (फार्मा), धातु (मेटल) और आभूषण क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रह सकते हैं। मेरी पसंद के शीर्ष 5 शेयरों में ऐक्सिस बैंक, हुडको, राइट्स, इंद्रप्रस्थ गैस और आईसीआईसीआई एसेट मैनेजमेंट शामिल हैं।
(शेयर मंथन, 24 जुलाई 2026)