विजय चोपड़ा
एमडी-सीईओ, इनॉक इंटरमीडियरीज
भारतीय शेयर बाजार ने अब तक काफी दृढ़ता दिखायी है। यदि रुपये में मजबूती, नीतिगत सुधार या इस तरह की कोई अच्छी खबर आती है, तो बाजार का रुख सकारात्मक रहना चाहिए।
अगले 6 महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका-ईरान युद्ध और भूराजनीतिक परिस्थितियाँ, कच्चे तेल एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, अमेरिकी शुल्क (टैरिफ), भारत की जीडीपी वृद्धि दर, कंपनियों के तिमाही नतीजे तथा महँगाई एवं ब्याज दरें शामिल होंगी। इसके अलावा, वैश्विक कारकों में रूस-यूक्रेन संघर्ष, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और चीन से जुड़ी परिस्थितियाँ भी भारतीय बाजार को प्रभावित करेंगी।
बाजार के लिए सकारात्मक कारकों में उपभोग (कंजंप्शन), आर्थिक सुधार, बढ़ता कर संग्रह और घरेलू फंडों की खरीदारी प्रमुख हैं। दूसरी ओर, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, राजकोषीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट), महँगाई, भूराजनीतिक परिस्थितियाँ, पूँजीगत व्यय (कैपेक्स) में अपेक्षित वृद्धि का अभाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली बाजार के लिए नकारात्मक कारक हैं।
मुझे अगले 6 महीनों में सेंसेक्स के 82,000 और निफ्टी के 26,500 तक पहुँचने की उम्मीद है। अगले 12 महीनों के लिए मेरा लक्ष्य सेंसेक्स के लिए 84,000 और निफ्टी के लिए 28,000 का है। सेंसेक्स का 1 लाख का स्तर 2028 तक हासिल हो सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) 1,300 रुपये और 2027-28 में 1,425 रुपये रह सकती है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनियों की आय में 0-10% की वृद्धि की उम्मीद है। मुझे 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5% और 2027-28 में 6.8% रहने की उम्मीद है। अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के अनुरूप रह सकता है। ब्याज दरों में किसी भी तरह की वृद्धि से बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) यानी नकदी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है और महँगाई का भी दबाव अनावश्यक रूप से बढ़ सकता है।
इन 12 महीनों में बिजली (पावर), रक्षा (डिफेंस), स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर), सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, रेलवे, बुनियादी ढाँचा, तेल-गैस, सौर ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। मेरी पसंद के शीर्ष 5 शेयरों में ट्रांसफर्मर्स ऐंड रेक्टिफायर्स इंडिया (टारिल), मोसचिप टेक्नोलॉजीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, मझगाँव डॉक, बीडीएल और बीईएल शामिल हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारतीय बाजार पर असर अब तक हल्का नकारात्मक रहा है। यह संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है और इनके बीच अंतिम समझौता होना भी अनिश्चित लग रहा है। हालाँकि, मुझे भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दिसंबर 2026 तक होने की उम्मीद है। यदि अगले 3-6 महीनों में यह समझौता हो जाता है, तो इसका भारतीय बाजार पर बहुत सकारात्मक असर पड़ सकता है।
ऐसा नहीं लगता कि वैश्विक एआई का बुलबुला फूट गया है, लेकिन अंततः ऐसा हो सकता है। इसका भारतीय बाजार पर कुछ असर पड़ेगा और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग भी प्रभावित होगा, जो इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत देर से आगे बढ़ा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय बाजार में फिर से शुद्ध खरीदार बन सकते हैं। अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 95-99 के दायरे में रह सकता है।
(शेयर मंथन, 24 जुलाई 2026)