शेयर मंथन में खोजें

जिंदल स्टील (Jindal Steel) को 87.40 करोड़ रुपये का घाटा

2019 की अप्रैल-जून तिमाही में जिंदल स्टील (Jindal Steel) को 87.40 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

इससे पहले जिंदल स्टील को 2018 की समान अवधि में 110 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। मगर 2019 की जनवरी-मार्च तिमाही में यह 2,713.34 करोड़ रुपये के भारी घाटे में रही थी। वहीं साल दर साल आधार पर ही जिंदल स्टील की तिमाही आमदनी 9,665.35 करोड़ रुपये से 2.9% की मामूली बढ़ोतरी के साथ 9,945.6 करोड़ रुपये रही, जबकि इसका क्रूड स्टील उत्पादन 12% की बढ़ोतरी के साथ 18.5 लाख टन और क्रूड स्टील बिक्री 14% अधिक 18.4 लाख टन रही।
इस दौरान जिंदल स्टील का एबिटा 2,277 करोड़ रुपये से 4.5% की गिरावट के साथ 2,173 करोड़ रुपये और एबिटा मार्जिन करीब 180 आधार अंक घट कर 21.8% रह गया।
बता दें कि जानकारों ने जिंदल स्टील की 9,513 करोड़ रुपये की आमदनी और 1,740 करोड़ रुपये के एबिटा का अनुमान लगाया था।
बीएसई में जिंदल स्टील का शेयर 94.75 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले सुबह वृद्धि के साथ 96.25 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान 105.45 रुपये के ऊपरी स्तर तक चढ़ा, जबकि नीचे की ओर 96.05 रुपये तक फिसला।
अंत में यह 9.05 रुपये या 9.55% की वृद्धि के साथ 103.80 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की बाजार पूँजी 10,566.45 करोड़ रुपये है। वहीं इसके पिछले 52 हफ्तों का शिखर 246.00 रुपये और निचला स्तर 94.00 रुपये रहा है। (शेयर मंथन, 14 अगस्त 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख