शेयर मंथन में खोजें

सपाट शुरुआत के बाद बाजार में गिरावट, निफ्टी 9,600 के नीचे

कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को सपाट खुलने के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आयी है।

सीमित मुनाफे के साथ इस समय निवेशक सावधानी से गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो 1 जुलाई से लागू होने की उम्मीद है। जीएसटी लागू होने का बाजार पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। बीएसई सेंसेक्स (Sensex) गुरुवार के 31,290.74 के बंद स्तर मुकाबले 31,300.39 पर खुलने के बाद करीब 10 बजे 85.68 अंक या 0.27% की कमजोरी के साथ 31,205.06 पर है। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) 9,643.25 पर खुल कर 37.10 अंक या 0.39% की गिरावट के साथ 9,592.90 पर चल रहा है। इस दौरान बाजार के छोटे और मँझोले शेयर सूचकांकों में और भी अधिक गिरावट है। बीएसई मिडकैप में 1.23% और बीएसई स्मॉल कैप में 1.26% की कमजोरी है। साथ ही निफ्टी मिड 100 में 1.30% और निफ्टी स्मॉल 100 1.29% गिर गये हैं।
इस समय सेंसेक्स के 31 दिग्गज शेयरों में से 11 शेयर हरे और 20 लाल निशान में हैं। मजबूत शेयरों में से सन फार्मा 0.76%, ल्युपिन 0.75%, डॉ रेड्डीज 0.71% और विप्रो 0.65% ऊपर हैं। वहीं गिरने वाले शेयरों में टाटा स्टील 2.00%, हीरो मोटोकॉर्प 1.73%, ओएनजीसी 1.59%, आईसीआईसीआई बैंक 1.36% और मारुति 1.28% नीचे चल रहे हैं। निफ्टी के 51 शेयरों में से इस समय 13 शेयरों में बढ़त है, जबकि 37 शेयर लाल निशान पर हैं और एक शेयर सपाट है। (शेयर मंथन, 23 जून 2017)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख