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जब शेयर बाजार गिर रहा हो या बढ़ रहा हो तो सही पोर्टफोलियो कैसे बनाएं?

आदिल जानना चाहते है कि शेयर बाजार गिर रहा हो या बढ़ रहा हो तो सही पोर्टफोलियो कैसे बनाएं? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं क्या करना चाहिए?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि इक्विटी कोई ऐसा साधन नहीं है जो हर साल लगातार पैसा बनाकर दे। अगर किसी को यह उम्मीद है कि हर साल रिटर्न मिलेगा, तो समस्या इक्विटी में नहीं, बल्कि उस सोच में है। इक्विटी का स्वभाव चक्रीय (cyclical) होता है। यह बिल्कुल सामान्य है कि एक-दो साल तक इसमें या तो रिटर्न न मिले या फिर नेगेटिव रिटर्न भी देखने को मिल जाए। लेकिन अगर कोई निवेशक पांच साल के पूरे चक्र को सही तरीके से हैंडल करता है, तो वही इक्विटी दो-तीन साल के रिटर्न से पूरे पांच साल का पैसा बनाकर दे देती है। यही इस प्रोडक्ट का नेचर है और इसे स्वीकार करना ही समझदारी है। किसी भी चीज से जिद करके पैसा नहीं बनाया जा सकता, ठीक वैसे ही जैसे नदी की धारा के खिलाफ तैरकर बहुत देर तक टिक पाना संभव नहीं होता।

निवेश का सबसे बड़ा ट्रिगर हमेशा इकॉनमी होनी चाहिए। अगर आपको लगता है कि देश या दुनिया की अर्थव्यवस्था में गहरी और लंबे समय की समस्या आ रही है, तब तो इक्विटी से दूरी बनाना समझ में आता है। लेकिन अगर पांच साल का इकॉनमिक आउटलुक ठीक दिखता है, तो बीच-बीच के उतार-चढ़ाव से डरना नहीं चाहिए। प्राकृतिक आपदाएं या अचानक घटनाएं हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन सावधानी और तैयारी हमारे हाथ में जरूर होती है। 

भरोसा, धैर्य और समझ का खेल!

असल में इक्विटी वह समय देती है जिसमें निवेशक खुद को तैयार कर सकता है। जो एक-डेढ़ साल पैसा नहीं बनता, वही समय सीखने, पोर्टफोलियो को समझने और रणनीति सुधारने का होता है। इस दौरान शोर-शराबा करने या शिकायत करने के बजाय अगर कोई सही सेक्टर्स में छोटे-छोटे रनिंग गेन बनाता रहे और उन्हें भविष्य के अवसरों में वापस निवेश करता रहे, तो कंपाउंडिंग अपने आप काम करने लगती है।

इक्विटी में पैसा रोने-धोने से नहीं बनता, बल्कि समझ, धैर्य और आत्म-अनुशासन से बनता है। बाजार को कोसने या सरकार-टैक्स को दोष देने से कुछ हासिल नहीं होता। अपने फैसलों की जिम्मेदारी खुद लें, प्रोडक्ट को समझें, उसका सम्मान करें और सही समय पर सही कदम उठाएँ। ऐसा करेंगे तो इक्विटी आपको निराश नहीं करेगी, बल्कि समय आने पर वही आपके लिए सबसे बड़ा धन-निर्माण का साधन बनेगी।


(शेयर मंथन, 27 दिसंबर 2025)

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