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23,000 के नीचे फिसला शेयर बाजार तो क्या निवेशकों को बदलनी होगी रणनीति?

बाजार में हाल ही में आई तेज़ी ने निवेशकों को राहत तो दी है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि बुधवार को निफ्टी में करीब 400 अंकों की मजबूत बढ़त देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार ने फिलहाल एक मजबूत आधार बना लिया है। तकनीकी रूप से देखें तो 22,300 के आसपास का स्तर एक अहम बॉटम के रूप में उभरता दिख रहा है। जब तक बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, 23,000 के नीचे क्लोजिंग आने पर रणनीति पर दोबारा विचार करना जरूरी होगा, क्योंकि यह कमजोरी का संकेत हो सकता है।

मौजूदा समय में सबसे बड़ी चुनौती है बाजार की अस्थिरता, जो वैश्विक घटनाओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और उसके खत्म होने को लेकर आ रहे विरोधाभासी संकेत बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी एकतरफा तेज़ रैली की उम्मीद करना सही नहीं होगा। बल्कि यह मानकर चलना चाहिए कि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और निवेशकों को धैर्य के साथ “बाय ऑन डिप्स” की रणनीति अपनानी चाहिए।

रेजिस्टेंस की बात करें तो 24,200–24,800 का जोन एक मजबूत बाधा के रूप में सामने आ रहा है, जहां 50% और 62% रिट्रेसमेंट स्तर के साथ-साथ मूविंग एवरेज भी मौजूद हैं। इस स्तर को पार करना आसान नहीं होगा और यहां से बाजार में हल्की गिरावट या कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। यदि सकारात्मक वैश्विक संकेत मिलते हैं, तो बाजार 25,000 तक भी जा सकता है, लेकिन फिलहाल इसके लिए मजबूत ट्रिगर की जरूरत होगी।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हाल की तेजी सिर्फ गिरावट की भरपाई के रूप में देखी जानी चाहिए, न कि नए बुल रन की शुरुआत के तौर पर। इन सेगमेंट्स में अभी भी 3 से 6 महीने तक कंसोलिडेशन की संभावना बनी हुई है। खासकर स्मॉलकैप इंडेक्स के लिए 17,000 और 18,000 के स्तर बड़े अवरोध (चोक पॉइंट) बने हुए हैं, जिन्हें पार करना आसान नहीं होगा।

आर्थिक मोर्चे पर, थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी चिंता का विषय है, जबकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5% रखा गया है। हालांकि यह वैश्विक स्तर पर मजबूत दिखता है, लेकिन बाजार के मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए यह आंकड़ा निवेशकों को बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं करता। फिर भी संभावना है कि साल के अंत तक ग्रोथ अनुमान 7% तक रिवाइज हो सकता है, बशर्ते मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां ज्यादा बिगड़ें नहीं।

बाजार ने नीचे का स्तर बना लिया है, लेकिन आगे की राह आसान नहीं होगी। निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए और गिरावट के दौरान ही धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति होगी। धैर्य, अनुशासन और सही जोखिम प्रबंधन ही इस समय सफलता की कुंजी है।

 



(शेयर मंथन, 16 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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