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आईसीआईसीआई बैंक के मुनाफे में 39% बढ़त

आईसीआईसीआई बैंक ने अक्टूबर-दिसंबर की तीसरी तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड मुनाफे में अच्छी बढ़त दर्ज की है, हालाँकि इसका स्टैंडअलोन मुनाफा लगभग सपाट रहा है। देश के सबसे बड़े निजी बैंक का तिमाही कंसोलिडेटेड मुनाफा अक्टूबर-दिसंबर 2007 के 1,119.82 करोड़ रुपये से बढ़ कर अक्टूबर-दिसंबर 2008 में 1,559.76 करोड़ रुपये रहा। इसमें 39.29% की बढ़ोतरी दर्ज की गयी। कुल कंसोलिडेटेड तिमाही आय 15,653 करोड़ रुपये की तुलना में 8.11% बढ़ कर 16,923 करोड़ रुपये पर पहुँची।

हालाँकि आईसीआईसीआई बैंक ने स्टैंडअलोन आधार पर अपने तिमाही मुनाफे में केवल 3.41% की बढ़त हासिल की। यह 1,230.21 करोड़ रुपये की तुलना में इस बार 1,272.15 करोड़ रुपये का रहा। इस कारोबारी साल के दौरान बैंक का प्रदर्शन लगातार फीका रहा है। इसका मुनाफा पहली तिमाही में 6% घटा था, जबकि दूसरी तिमाही में केवल 1% की बढ़त दर्ज हुई थी। हालाँकि इस बार का मुनाफा इसी कारोबारी साल की दूसरी तिमाही के 1,014 करोड़ रुपये से 25% ज्यादा रहा है। स्टैंडअलोन तिमाही आय साल-दर-साल बिना किसी खास बदलाव के 10,338 करोड़ रुपये की तुलना में 10,350 करोड़ रुपये की रही।

बैंक की शुद्ध ब्याज आय (नेट इन्ट्रेस्ट इन्कम या एनआईआई) 1,960 करोड़ रुपये की तुलना में 1,990 करोड़ रुपये रही, यानी इसमें केवल 1.53% का इजाफा हो सका। दूसरी तिमाही की 2,148 करोड़ रुपये की शुद्ध ब्याज आय की तुलना में इस बार यह रकम 7.36% कम रही है। बैंक ने अपने कामकाजी खर्च में साल-दर-साल 19% की कमी की है। यह खर्च 2,080 करोड़ रुपये से घट कर 1,680 करोड़ रुपये रह गया। खर्च में इस कमी के चलते लागत/औसत परिसंपत्ति अनुपात 2.2% से घट कर 1.8% हो गया। शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) अक्टूबर-दिसंबर 2007 के 2.3% की तुलना में कुछ सुधार के साथ 2.4% पर रहा।

आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी ट्रेजरी आय में काफी इजाफा किया है। पिछले कारोबारी साल की तीसरी तिमाही में 282 करोड़ रुपये की ट्रेजरी आय और इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में 153 करोड़ रुपये के ट्रेजरी घाटे की तुलना में इस बार 976 करोड़ रुपये की ट्रेजरी आय हासिल हुई है।

एक खास बात यह है कि बैंक द्वारा दिये गये कुल कर्ज की राशि में कमी आयी है। कुल कर्ज की राशि 31 दिसंबर 2008 को 212,521 करोड़ रुपये रही, जो पिछले कारोबारी साल की तीसरी तिमाही की तुलना में 2996 करोड़ रुपये या 1.39% कम है। कुल कर्ज की राशि इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही के अंत में 221,985 करोड़ रुपये थी। यानी बीती तिमाही के दौरान बैंक के कुल कर्जों में 9464 करोड़ रुपये या 4.26% की कमी आयी है। इसी तरह बैंक की कुल जमाराशियों में भी कमी आयी है। बैंक की कुल जमाराशियाँ (डिपॉजिट) 31 दिसंबर 2008 को 209,065 करोड़ रुपये की थीं, जो पिछले कारोबारी साल की तीसरी तिमाही की तुलना में 9% कम है। इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही की तुलना में कुल जमाराशियाँ 14,337 करोड़ रुपये या 6.42% घटी हैं। कर्ज की तुलना में जमाराशियों में ज्यादा कमी आयी है, जिससे बैंक को अपने ब्याज खर्च पर नियंत्रण रखने में मदद मिली है। यह साफ है कि बैंक ने डूबे कर्जों के बढ़ते अनुपात की वजह से कारोबार में धीमी बढ़त की रणनीति अपना रखी है।

बैंक के लिए एक बड़ी चिंता की बात यह है कि इसके डूबे कर्जों (एनपीए) में इजाफा हुआ है। इसका शुद्ध (नेट) एनपीए 3,227.82 करोड़ रुपये से 36% बढ़ कर 4,400.23 करोड़ रुपये हो गया। प्रतिशत के लिहाज से शुद्ध एनपीए अक्टूबर-दिसंबर 2007 के 1.50% से बढ़ कर बीती तिमाही में 2.07% हो गया है। इसी तरह सकल (ग्रॉस) एनपीए 2.96% से बढ़ कर 4.14% हो गया है। बैंक के मुताबिक खास तौर पर खुदरा श्रेणी में डूबे कर्जों में ज्यादा इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि बैंक के कुल कर्जों में खुदरा कर्जों की हिस्सेदारी आधी से ज्यादा है।

बैंक ने अपने कर्जों का जो ताजा ब्यौरा सामने रखा है, उसके मुताबिक 212,521 करोड़ रुपये के कुल कर्जों में से 54% हिस्सा खुदरा श्रेणी का, 12% हिस्सा घरेलू कॉर्पोरेट क्षेत्र का, 4% ग्रामीण क्षेत्र का,  4% छोटे-मंझोले उद्यमों (एसएमई) का और 26% विदेशी कर्जों का है। खुदरा श्रेणी के तहत दिये गये कर्जों का ब्यौरा देखें, तो इसमें 53% हिस्सा घर कर्ज और 28% हिस्सा वाहन (ऑटो) कर्ज का है। निजी कर्जों (पर्सनल लोन) की हिस्सेदारी 9.5% और क्रेडिट कार्ड कर्जों की हिस्सेदारी 7% है। इन दोनों तरह के कर्जों को ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की तरह ही आईसीआईसीआई बैंक के इन नतीजों पर भी बाजार की पहली प्रतिक्रिया मंगलवार 27 जनवरी को ही दिखेगी। शुक्रवार को आईसीआईसीआई बैंक का शेयर भाव बीएसई में 3.71% गिर कर 364.30 रुपये पर बंद हुआ था। बीते लगभग एक महीने के दौरान इसमें 17% की गिरावट आयी है।

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