कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कच्चे माल की लागत का दबाव अब धीरे-धीरे कम होता दिखायी दे रहा है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद क्रूड ऑयल, पैलेडियम (PGM) और एल्यूमिनियम जैसी प्रमुख कमोडिटी की कीमतों में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गयी है। इससे वाहन निर्माता कंपनियों (OEMs) की उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है। हालाँकि स्टील और रबर की कीमतें अभी भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले महीनों में रबर की कीमतों में भी नरमी आ सकती है, जिससे उद्योग को और राहत मिलेगी।
पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा
रिपोर्ट के अनुसार पैसेंजर व्हीकल (PV) और टू-व्हीलर (2W) कंपनियों को लागत में गिरावट का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। इसकी वजह इन वाहनों में एल्यूमिनियम और पैलेडियम का ज्यादा इस्तेमाल होना है, जिनकी कीमतों में हाल के दिनों में अच्छी-खासी गिरावट आई है। दूसरी ओर कमर्शियल व्हीकल (CV) और ट्रैक्टर कंपनियों में स्टील और रबर का इस्तेमाल अधिक होता है, जिनकी कीमतें अभी तक ज्यादा नहीं घटी हैं। इसलिए इन सेगमेंट्स को अपेक्षाकृत कम फायदा मिलने का अनुमान है।
दूसरी तिमाही से सुधर सकते हैं मार्जिन
कोटक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर कच्चे माल की ऊँची कीमतों का असर दिखायी देगा। हालाँकि मौजूदा स्पॉट प्राइस को देखते हुये दूसरी तिमाही (Q2FY27) से मार्जिन में सुधार शुरू हो सकता है। इसके अलावा औद्योगिक एलएनजी (LNG) की कीमतों में मार्च के उच्च स्तर से लगभग 25% की गिरावट भी कंपनियों की ऊर्जा लागत कम करने में मदद करेगी। कई ऑटो कंपनियाँ पहले ही वाहन कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं, जिससे लागत का दबाव और कम हो सकता है।
माँग बनी हुयी है मजबूत
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ऑटो सेक्टर में माँग मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में पैसेंजर व्हीकल की खुदरा बिक्री में 18% और टू-व्हीलर बिक्री में 10% की सालाना वृद्धि दर्ज की गयी है। वहीं मई 2026 में कमर्शियल व्हीकल बिक्री 7% बढ़ी, जबकि ट्रैक्टर बिक्री भी मजबूत बनी रही। कोटक का मानना है कि जीएसटी से जुड़े सकारात्मक प्रभाव और ग्रामीण माँग के चलते पहली छमाही में ऑटो सेक्टर की बिक्री मजबूत रह सकती है, हालाँकि दूसरी छमाही में ऊँचे बेस का असर देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
ब्रोकरेज का मानना है कि लागत का दबाव कम होने और माँग मजबूत रहने से ऑटो सेक्टर की कंपनियों की लाभ में आने वाली तिमाहियों में सुधार देखने को मिल सकता है। खासकर पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर कंपनियाँ इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकती हैं। हालाँकि अल नीनो, रबर की ऊँची कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ ऐसे जोखिम हैं जिन पर निवेशकों को नजर बनाये रखनी चाहिये।
(शेयर मंथन, 4 जुलाई 2026)