शेयर मंथन में खोजें

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश का सही समय और रणनीति क्या है?

मिडकैप और स्मॉलकैप का असली दौर 2026 की दूसरी छमाही से शुरू होता दिख रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि अगर तेजी छह महीने बाद आनी है तो निवेश भी तब ही किया जाए या अभी से शुरुआत कर दी जाए।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते हैं कि रणनीति साफ है- मिड और स्मॉलकैप में SIP के जरिए धीरे-धीरे बने रहना बेहतर है। अगले छह महीने में अगर निफ्टी 27,000-28,000 की रेंज की ओर जाता है, तो पहला रिटर्न लार्जकैप से मिलने की संभावना ज्यादा है। इसलिए लार्जकैप से कमाई करते हुए मिड और स्मॉलकैप में एसआईपी चालू रखना समझदारी है, खासकर उन क्वालिटी कंपनियों में जिनका मार्केट कैप 5,000-8,000 करोड़ से ऊपर हो और जहां लिक्विडिटी का जोखिम न हो। 2026 से एक नए बाजार चक्र की नींव रखी जाती दिख रही है। लार्जकैप और बैंकिंग शुरुआती लीडर होंगे, मिड और स्मॉलकैप 2026 की दूसरी छमाही से चमकेंगे और 2027-28 में तेजी अपने शिखर की ओर जा सकती है। बीच-बीच में करेक्शन आएंगे, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यही मौके सबसे ज्यादा मूल्य पैदा करेंगे।

https://www.youtube.com/live/eM8kyK15c5w

(शेयर मंथन, 29 दिसंबर 2025)

(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख