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एक्सपर्ट से जानें बाइंग क्लाइमेक्स क्या होता है, इसे समय पर पहचानना क्यों जरूरी है?

राजीव सेठी जानना चाहते है कि बाइंग क्लाइमेक्स क्या होता है और हमें कैसे पता चले कि बाइंग क्लाइमेक्स का समय आ गया है? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं इस सवाल का जवाब।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि बाइंग क्लाइमेक्स, सेलिंग क्लाइमेक्स का ठीक उल्टा होता है। जहां सेलिंग क्लाइमेक्स डर और घबराहट का चरम होता है, वहीं बाइंग क्लाइमेक्स लालच और उत्साह का चरम होता है। सेलिंग क्लाइमेक्स को समझना पहले आसान है। जैसे 2020 में कोविड के समय बाजार में तेज गिरावट आई थी। उस वक्त हालात ऐसे हो गए थे कि न सिर्फ शेयर खरीदने की इच्छा खत्म हो गई थी, बल्कि “शेयर मार्केट” शब्द से ही डर लगने लगा था। जब लगातार गिरावट के बाद मांग लगभग खत्म हो जाती है, चारों तरफ नेगेटिव खबरें होती हैं और लोग नुकसान से तंग आ जाते हैं। वहीं जाकर सेलिंग क्लाइमेक्स बनता है। तकनीकी तौर पर इसे गैप्स, एक्सॉस्शन मूव और रिवर्सल के जरिए पहचाना जाता है। 

अब ठीक इसका उल्टा होता है बाइंग क्लाइमेक्स। इसे आप मेल्ट-अप भी कह सकते हैं। यानी शेयर या बाजार बिना रुके ऊपर ही ऊपर भागता चला जाता है। हर कोई खरीदना चाहता है, फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) पैदा हो जाता है और लोग वैल्यूएशन या लॉजिक देखना बंद कर देते हैं। ऐसे समय में दाम न तो वैल्यूएशन से सपोर्टेड होते हैं और न ही कोई नया मजबूत ट्रिगर होता है, फिर भी कीमतें लगातार ऊपर जाती रहती हैं। जब किसी शेयर में कई बार तेज रन-अप हो चुका होता है और लगभग हर निवेशक उसमें शामिल हो चुका होता है, तब एक समय ऐसा आता है जब आगे नयी खरीदारी की ताकत खत्म होने लगती है। यहीं पर बाइंग क्लाइमेक्स बनता है। इसके बाद आमतौर पर उस शेयर में करेक्शन या कंसोलिडेशन शुरू होता है, क्योंकि अब खरीदने वाले कम और मुनाफा बुक करने वाले ज्यादा हो जाते हैं। 

बाइंग क्लाइमेक्स को पहचानने का तरीका

बाइंग क्लाइमेक्स को पहचानने के कई तरीके हैं और हर निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग पैरामीटर इस्तेमाल करता है। कुछ लोग 20-दिन के मूविंग एवरेज (20 DMA) को देखते हैं-अगर तेज रन के बाद शेयर इसके नीचे आ जाए तो यह बाइंग क्लाइमेक्स का संकेत हो सकता है। कुछ लोग 20-वीक DMA, कुछ 9-10 दिन या 9-10 हफ्ते के एवरेज देखते हैं। कोई एक तय नियम नहीं है, लेकिन जिस टेक्निकल पैरामीटर पर आप भरोसा करते हैं, उसके नीचे ब्रेक होना अक्सर संकेत देता है कि बाइंग क्लाइमेक्स बन चुका है। बाइंग क्लाइमेक्स कोई एक दिन की घटना नहीं होती, बल्कि एक प्रक्रिया होती है। इसे पहचानने के लिए कीमतों का व्यवहार, वैल्यूएशन से दूरी, तेज और लगातार तेजी, और तकनीकी सपोर्ट्स का टूटना। इन सबको मिलाकर देखना जरूरी होता है। सही समय पर इसे समझ लेना निवेशकों को बड़े करेक्शन से बचा सकता है।


(शेयर मंथन, 02 जनवरी 2026)

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