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आईसीआईसीआई बैंक शेयरों में निवेश करने से पहले किन बातों पर रखें खास नजर?

आईसीआईसीआई बैंक को लेकर इस समय बैंकों के सेक्टर में तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आती है। मौजूदा हालात में बैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे बड़ा बैरोमीटर क्रेडिट ग्रोथ है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि देश की सरकार और रेगुलेटर दोनों का फोकस अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बनाए रखने और क्रेडिट को बढ़ावा देने पर है, तो क्रेडिट ग्रोथ को लेकर ज्यादा संशय की गुंजाइश नहीं बचती। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ को लगभग 12% के आसपास रखने का लक्ष्य है, और ऐसे में बैंकों से यह उम्मीद स्वाभाविक है कि उनकी क्रेडिट ग्रोथ 12 से 15% के दायरे में बनी रहे।

बीच-बीच में क्रेडिट ग्रोथ 18% तक भी जा सकती है, लेकिन उसका लंबे समय तक टिके रहना जरूरी या स्वस्थ नहीं माना जाता। बहुत ज्यादा तेज क्रेडिट ग्रोथ से अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिसे बाद में कंट्रोल करना एक अलग और बड़ी चुनौती बन जाता है। इसलिए ICICI बैंक जैसे बड़े निजी बैंक के लिए सबसे संतुलित स्थिति यही मानी जाएगी कि वह इंडस्ट्री के आसपास या उससे थोड़ा बेहतर ग्रोथ दिखाए। नतीजों के दौरान निवेशकों और विश्लेषकों की खास नजर एसेट क्वालिटी पर रहेगी। एनपीए यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स में अगर हल्का-फुल्का दबाव भी दिखता है, तो वह स्वीकार्य हो सकता है, बशर्ते वह बहुत सीमित दायरे में रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर एनपीए में 5 बेसिस पॉइंट से कम का इजाफा होता है तो उसे सामान्य माना जा सकता है। लेकिन इससे ज्यादा गिरावट एसेट क्वालिटी में आई, तो वह चिंता का विषय बन सकती है।

आईसीआईसीआई बैंक के नतीजों में सबसे अहम तीन चीजें होंगी- क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार, एसेट क्वालिटी यानी एनपीए की स्थिति और मैनेजमेंट का आउटलुक। अगर ये तीनों संतुलित और नियंत्रण में रहते हैं, तो बैंकिंग सेक्टर में ICICI बैंक की स्थिति मजबूत बनी रह सकती है और निवेशकों का भरोसा कायम रहेगा।


(शेयर मंथन, 19 जनवरी 2026)

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