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वेदांता शेयर 670 के पार पहुँचा, अब निवेशक मुनाफा निकालें या आगे की तेजी का इंतजार करें?

अश्विनी जानना चाहते हैं कि उन्हें वेदांता (Vedanta) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? उन्होंने 227 रुपये पर खरीदा था और उनके पास 100 शेयर हैं। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि मेटल सेक्टर स्वभाव से ही काफी साइक्लिकल और उतार-चढ़ाव वाला होता है। इसमें यह मानकर नहीं चला जा सकता कि एक बार खरीदा और चैन से लंबे समय तक बैठे रहे तो बिना बड़े करेक्शन के लगातार मुनाफा मिलता रहेगा। मेटल शेयरों में तेज़ी के बाद अक्सर 30 से 50 फीसदी तक का करेक्शन देखने को मिलता है और फिर नया साइकिल शुरू होता है।

फिलहाल वेदांता के चार्ट को देखें तो माना जा रहा है कि इसका टॉप ज़ोन लगभग 770 रुपये के आसपास बन सकता है, जबकि नीचे की तरफ 575 से 600 रुपये के बीच मजबूत सपोर्ट दिखाई देता है। यानी आने वाले समय में वेदांता इसी दायरे में मूव करता नजर आ सकता है। अश्विनी जिस भाव 227 रुपये पर बैठे हैं, वहां से उन्हें काफी अच्छा मुनाफा मिल चुका है। ऐसे में यह समझदारी भरी सोच हो सकती है कि कुछ मुनाफा टेबल से निकाल लिया जाए, क्योंकि मेटल सेक्टर में अचानक तेज़ गिरावट का खतरा हमेशा बना रहता है। 

मेटल सेक्टर का साइकिल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास से जुड़ी गतिविधियों में तेजी रहने की संभावना रहती है, जिससे मेटल की मांग को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि यह साइकिल अब मैच्योर स्टेज की ओर बढ़ता हुआ दिख रहा है। निफ्टी मेटल इंडेक्स के आधार पर देखा जाए तो यहां से मेटल सेक्टर में अपसाइड शायद 10 से 15 फीसदी तक ही बचा हुआ है। इसके बाद जोखिम काफी तेजी से बढ़ सकता है। यह भी मुमकिन है कि यहीं से कमजोरी शुरू हो जाए, क्योंकि मौजूदा तेजी का यह चरण आसान नहीं बल्कि ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है।

अगर कोई निवेशक बड़े करेक्शन को सहने की क्षमता रखता है और 4-5 साल का लंबा इंतजार कर सकता है, तो वह पूरे साइकिल में बने रहने का फैसला ले सकता है। लेकिन अगर 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट झेल पाना मुश्किल लगता है, तो आंशिक मुनाफावसूली करके जोखिम कम करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है। अंत में यह फैसला पूरी तरह निवेशक को खुद लेना चाहिए। ऐसी चर्चाओं को केवल एक इनपुट की तरह देखना चाहिए और अपने रिसर्च, जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य के हिसाब से ही अंतिम निर्णय लेना समझदारी होगी।


(शेयर मंथन, 09 फरवरी 2026)

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