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क्या आईटी सेक्टर में 30,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट साबित होगा?

आईटी सेक्टर इस समय दबाव में जरूर है, लेकिन घबराने जैसी स्थिति अभी नहीं दिखती। हालिया कारोबार में लगभग 1% की गिरावट देखने को मिली और दिन में आई हल्की मजबूती टिक नहीं पाई।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि तकनीकी तौर पर 30,000-31,500 का जो दायरा है, वह महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बन चुका है। मौजूदा स्तरों पर काफी हद तक करेक्शन पहले ही हो चुका है और 30,000 के नीचे कोई नई बड़ी नकारात्मक खबर आए बिना एकतरफा बड़ी गिरावट की आशंका कम नजर आती है। ऐसे में इंडेक्स को कुछ समय कंसोलिडेशन की जरूरत हो सकती है।

अगर लंबी अवधि के चार्ट पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि 2022 के आसपास जो स्तर थे, आईटी इंडेक्स आज भी लगभग उसी दायरे में है। इसका मतलब है कि कोविड के बाद बने ऊंचे वैल्यूएशन, वर्क फ्रॉम होम की कहानी और एआई जैसे नैरेटिव्स के कारण जो अतिरिक्त प्रीमियम मिला था, वह काफी हद तक निकल चुका है। अब सेक्टर में ‘कहानी’ कम और ‘रियलिटी’ ज्यादा बची है। कंपनियां अब मजबूरी में अपने एआई से जुड़े राजस्व का खुलासा कर रही हैं, लेकिन एआई से तात्कालिक बड़े मुनाफे की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। एआई एक लंबी अवधि की थीम है, जिसका वास्तविक असर पूरी तरह दिखने में 5 से 10 साल तक लग सकते हैं।

एफआईआई और डीआईआई दोनों की हालिया बिकवाली में भू-राजनीतिक तनाव का असर दिखा है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास अभी भी पर्याप्त नकदी और एसआईपी फ्लो का सहारा है। गिरावट के बड़े स्तरों पर डीआईआई सपोर्ट दे सकते हैं, क्योंकि उन्हें अंततः पूंजी तैनात करनी ही होती है। इसलिए बाजार में हर गिरावट घबराहट का संकेत नहीं, बल्कि आंशिक रिबैलेंसिंग भी हो सकती है।

रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो सरकार ने अर्थव्यवस्था को कंजम्प्शन आधारित ग्रोथ की दिशा में मोड़ने का संकेत दिया है, जिसके बाद कैपेक्स का चक्र मजबूत हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को यह समझना होगा कि आईटी का मौजूदा ढांचा सर्विस-ओरिएंटेड है, न कि प्रोडक्ट-ओरिएंटेड। एआई जैसे क्षेत्रों में सर्विस कंपनियां अपेक्षाकृत कम समय में खुद को ढाल सकती हैं, जबकि बड़े प्रोडक्ट डेवलपमेंट मॉडल में लंबी अवधि का निवेश और धैर्य चाहिए। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि विज़न की कमी है, बल्कि बिजनेस मॉडल की प्रकृति अलग है।

समग्र रूप से आईटी सेक्टर में त्वरित तेज रिटर्न की संभावना कम दिखती है, लेकिन भारी गिरावट की आशंका भी सीमित है जब तक कोई नई संरचनात्मक समस्या सामने न आए। निवेशकों को सेक्टर को यथार्थवादी नजरिए से देखना चाहिए न तो अत्यधिक उत्साह और न ही अत्यधिक निराशा। दीर्घकाल में अवसर बने रहेंगे, लेकिन निकट अवधि में धैर्य और चयनात्मक रणनीति ही बेहतर परिणाम दे सकती है।


(शेयर मंथन, 26 फरवरी 2026)

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