शेयर मंथन में खोजें

सोयाबीन में तेजी, रिफाइंड सोया तेल और सीपीओ में नरमी का रुझान - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,330-3,370 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

बढ़ती आवक के बावजूद माँग में बढोतरी के कारण देश के हाजिर बाजारों में सोयाबीन की कीमतों में तेजी रहने का रुझान है। घरेलू बाजार में सोयाबीन की बढ़ती माँग के कारण मिलों की ओर से पेराई के लिए सोयाबीन की अधिक माँग हो रही है। बेंचमार्क बाजार इंदौर में 10% नमी वाली अच्छी क्वालिटी के सोयाबीन की कीमतें 50 रुपये से बढ़ कर 3,200-3,400 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही हैं। रिफाइंड सोया तेल वायदा (फरवरी) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 734-738 रुपये के दायरे में साइडवेज कारोबार करने की संभावना है। कारोबारियों को उम्मीद है कि निकट भविष्य में सोया तेल की माँग में स्थिरता रहने की संभावना है लेकिन सीबोट में सोया तेल की कीमतों में अधिक नरमी की स्थिति में घरेलू सोया तेल की कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। सोया तेल की रिटेल माँग कम होने के कारण थोक कारोबारी बाजार से दुरी बनाये हुए हैं। सीपीओ वायदा (फरवरी) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 557-561 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। घरेलू और वैश्विक फंडामेंटल के कमजोर होने के कारण कारोबारी आरबीडी पॉमलीन की खरीदारी से दूरी बनाये हुए हैं। सरसों वायदा (अप्रैल) की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। और कीमतों में 3,980-3,960 रुपये तक गिरावट हो सकती है। कम बुआई के बावजूद सरसों तेंल और सरसों केक की कम बिक्री के कारण कीमतों में नरमी का रुझान है। सरसों की पेराई मार्जिन लगभग 900 रुपये प्रति टन है, जिसके कारण मिलें थोक खरीदारी से दूरी बनाये हुए हैं। (शेयर मंथन, 19 जनवरी 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख