शेयर मंथन में खोजें

सोयाबीन में तेजी, जबकि रिफाइंड सोया तेल में मंदी का रुझान - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतें तेजी के रुझान के साथ 3,550-3,600 रुपये तक बढ़त दर्ज कर सकती हैं।

घरेलू खपत और निर्यात के लिए सोयाबीन की बेहतर माँग के कारण देश के हाजिर बाजारों में तेजी का रूझान है। बेंचमार्क बाजार इंदौर में 10% नमी वाली अच्छी क्वालिटी के सोयाबीन की कीमतें 3,300-3,500 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही हैं। पॉल्ट्री किसान मौजूदा कीमतों पर सोयामील की खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि मौजूदा समय में ब्रॉयलर चिकन की अधिक माँग हो रही है। रिफाइंड सोया तेल वायदा (फरवरी) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 732-738 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। सोया तेल की लगातार माँग के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोया तेल की कीमतों में नरमी के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी नही हो रही है। सीपीओ वायदा (फरवरी) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ कारोबार करने की संभावना है और कीमतें 561 रुपये के स्तर से नीचे ही कारोबार कर सकती हैं। घरेलू बाजारों में माँग कम होने से नरमी का सेंटीमेंट है। यूरोपीय नीति निर्माताओं द्वारा 2021 से मोटर ईंधनों में पॉम ऑयल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध को मंजूरी दिये जाने की खबरों से भी कीमतों में नरमी का रुझान है। सरसों वायदा (अप्रैल) की कीमतों के 4,060-4,090 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के अनुसार पिछले गुरूवार तक देश में सरसों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 5% की कमी के साथ 6.7 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। (शेयर मंथन, 23 जनवरी 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख