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चने पर बिकवाली का दबाव, कॉटन में तेजी का रुझान - एसएमसी

दालों के भारी भरकम भंडार और चना की कीमतों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमों के बीच रस्साकसी जारी रहने की संभावना है।
लेकिन ऐसा दिख रहा है कि आपूर्ति अधिक हो रही है। सरकार द्वारा उठाये जा रहे अनेक कदमों से कीमतों में वापसी की कोशिशों के बाद भी चने में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि कारोबारी कीमतों में बढ़ोतरी होने का फायदा उठाने के लिए बिकवाली कर रहे हैं। इस कारण नरमी का रुझान बरकरार रहने की संभावना है और मई वायदा की कीमतें नीचे टूट कर 3,450-3,400 रुपये तक गिरावट दर्ज कर सकती हैं।
एमसीएक्स में कॉटन वायदा (मई) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 20,700-21,000 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतें 7 महीने के उच्च स्तर पर कारोबार कर रही हैं, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों को मदद मिलने की संभावना है। अमेरिका के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य टेक्सास में सूखे मौसम के कारण आईसीई में कपास की कीमतों को मदद मिल रही है। घरेलू बाजार में रुपये के वर्ष के निचले स्तर 66.97 पर पहुँचने के कारण निर्यातकों को मदद मिलने से निर्यात में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
ग्वारसीड के लगभग 1.07 करोड़ बैग के भारी भरकम अंतिम स्टॉक के कारण ग्वारसीड समूह की कीमतों में 3,600 रुपये तक नरमी का रुझान बरकरार रहने की संभावना है, जबकि ग्वारगम (मई) वायदा की कीमतों में 8,200 रुपये तक गिरावट हो सकती है। वर्तमान समय में ग्वारगम का निर्यात भी बहुत उत्साहजनक नही है। यदि ग्वारगम का निर्यात 50.000 टन प्रतिमाह से अधिक होता है, तभी ग्वारसीड के भंडार में कमी आ सकती है। वरना ग्वारसीड और ग्वारगम की कीमतों में किसी बड़ी वापसी की संभावना बहुत कम है। (शेयर मंथन 02 मई 2018)
 

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