शेयर मंथन में खोजें

हल्दी और इलायची में हो सकती है गिरावट - एसएमसी

हल्दी वायदा (नवंबर) की कीमतों में 6,530 रुपये तक गिरावट जारी रहने की संभावना है।

कम आवक के कारण इरोद के बाजारों में हाजिर कीमतों में मिला-जुला रुझान है। आवक कम होकर 1,600 बैग रह गयी है और केवल खराब और मध्यम क्वालिटी की हल्दी की आवक हो रही है। इरोद को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी में रूट वेरायटी की कीमतों में 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अन्य वेराइटी की कीमतों में गिरावट हुई है। इसी तरह रेगुलेटेड मार्केट कमिटी और इरोद टर्मरिक
मर्चेन्ट्स एसोसिएशन सेल्स यार्ड में फिंगर वेरायटी की कीमतों में 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट हुई है।
जीरा वायदा (नवंबर) की कीमतों के 1,98,000 रुपये तक बढ़त दर्ज करने की संभावना है। गुजरात के बाजारों में कम आवक के बीच माँग में बढ़ोतरी के कारण जीरे की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। गुजरात के बाजारों में जीरे की कीमतों में 40-50 रुपये प्रति 20 किलो ग्राम की बढ़ोतरी हुई है, जबकि राजस्थान में 100 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। इस बीच आगामी त्योहारों के दौरान खपत में बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए कारोबारी अधिक कीमतों पर भी जीरे की खरीदारी कर रहे हैं। दूसरी ओर मंडियों में आवक की रफ्तार काफी कम है।
इलायची वायदा (नवम्बर) की कीमतों में 1,300 रुपये तक गिरावट हो सकती है। उत्पादकों द्वारा अपनी नकदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए इलायची की तेजी से बिकवाली के कारण पिछले कुछ दिनों से कीमतों में तेजी से गिरावट हुई है। इलायची की कीमतें फिलहाल 1,200-1,300 रुपये किलो ग्राम के दायरे में कारोबार कर रही हैं। (शेयर मंथन, 09 अक्टूबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख