कॉटन में थम सकती है गिरावट, चने में तेजी के संकेत - एसएमसी

कॉटन वायदा (दिसंबर) कीमतों की कीमतों में 22,350-22,200 रुपये के स्तर पर सहारा रहने की संभावना है।

मौजूदा सीजन में कम उत्पादन अनुमान के कारण कीमतों की गिरावट पर रोक लगी रह सकती है। भारतीय कपास निगम ने उत्पादन क्षेत्रों में खराब मौसम और पानी की कमी को देखते हुए 1 अक्टूबर से शुरू मौजूदा सीजन 2018-19 में 343.50 लाख बेल कपास उत्पादन का अनुमान लगाया है। निगम के अनुसार अक्टूबर 2018 में 27 लाख बेल कपास खपत का अनुमान है, जबकि समान अवधि में 2.50 लाख बेल कपास निर्यात होने का अनुमान है। 2018-19 के अंत में कैरी ओवर स्टॉक 15.25 लाख बेल रहने का अनुमान है।
ग्वारसीड वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 4,630-4,7450 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है। वैश्विक वितीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से विश्व बाजार में ग्वारगम की माँग बाधित हो रही है। ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद अमेरिकी कच्चे तेल की आपूर्ति में बढ़ोतरी होने से संकेत से तेल की कीमतें 6 महीने से अधिक के निचले स्तर पर पहुँच गयी हैं।
रबी सीजन में कम उत्पादन अनुमान के कारण चना वायदा (दिसंबर) की कीमतों में 4,325 रुपये तक तेजी दर्ज किये जाने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 31 अक्टूबर तक देश भर में 2.2 मिलियन हेक्टेयर में चने की बुआई हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15.2% कम है। कर्नाटक और महाराष्ट्र में चना की बुआई क्रमशः 4,28,000 हेक्टेयर और 8,85,000 हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 50% कम है। (शेयर मंथन, 06 नवंबर 2018)

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