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सरसों और सीपीओ की कीमतों के गिरने की संभावना - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (जनवरी) की कीमतों के 3,310-3,350 रुपये के दायरे में ही बरकरार रहने की संभावना है।

सोयामील के बेहतर निर्यात की उम्मीद से पेराई मिलों द्वारा सोयाबीन की खरीदारी किये जाने के कारण बेंचमार्क इंदौर में कीमतों में तेजी का रुझान है और कीमतें 3,200-3,325 रुपये 100 किलो ग्राम के दायरे में हैं, जबकि प्लांट डिलीवरी की कीमतें 3,440 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम हो गयी हैं। विदेशी बाजारों में भारतीय सोयामील की कीमतों का अंतर 25-40 डॉलर प्रति टन होने की स्थिति में सोयामील की निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है।
सरसों वायदा (जनवरी) की कीमतों के 3,900 के सहारा स्तर से नीचे टूट कर 3,850-3,830 रुपये तक लुढ़कने की संभावना है। निजी कारोबारियों, स्टॉकिस्टों और किसानों के पास लगभग 6-8 लाख टन सरसों का स्टॉक है, जिससे सरसों की कुल उपलब्धता 10-12.4 लाख टन हो गयी है, जो फरवरी में नयी फसल की आवक पूरा होने तक पर्याप्त है। सरसों उत्पादक अधिकांश राज्यों में मौसम सरसों की खेती के काफी अनुकूल हो गया है। इसलिए कारोबारियों को उम्मीद है कि सरसों का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 5% अधिक हो सकता है।
सीपीओ (दिसंबर) वायदा की कीमतों के 503 रुपये के सहारा स्तर से नीचे टूट कर 500-498 रुपये तक लुढ़कने की संभावना है। अमेरिकी सोया तेल की कीमतों में नरमी और अधिक उत्पादन के कारण बीएमडी में पॉम ऑयल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट हुई है और कीमतों में 6% से अधिक की गिरावट हुई है। कीमतें वर्ष के निचले स्तर पर पहुँच गयी है। (शेयर मंथन, 26 दिसंबर 2018)

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