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कॉटन और चने में तेजी की संभावना - एसएमसी

कॉटन वायदा (अप्रैल) की कीमतें दो महीने के उच्च स्तर पर कारोबार कर रही हैं।
इसमें आगे भी 22,600 रुपये तक बढ़त जारी रहने की संभावना है। इसका मुख्य कारण बाजारों में आवक में भारी कमी और देश भर के किसानों के पास केवल 55-60 लाख बेल कपास ही बचा होना है। साथ ही इस सीजन में 32-33 लाख बेल कपास की कमी हो सकती है। वर्तमान समय में गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के कुछ ही किसानों के पास स्टॉक बचा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों के पास तो स्टॉक ही नहीं है।
चना वायदा (मई) की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है और आपूर्ति में कमी के कारण कीमतों को 4,440 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता हैं। इस वर्ष के अंत तक घरेलू दालों के भंडार में कमी का अनुमान लगाते हुए दाल मिलों ने नयी फसल की आवक से दो महीने का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। वर्तमान समय में महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के हाजिर बाजारों में पिछले वर्ष की तुलना में दालों की आवक भी कम हो रही है।
ग्वारसीड और ग्वारगम वायदा (मई) की कीमतों को क्रमशः 4,440 रुपये और 9,040 रुपये के स्तर पर सहारा रह सकता हैं। इस वर्ष मॉनसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान के कारण इन कमोडिटीज की कीमतों में तेजी रह सकती है। स्काइमेट का अनुमान है कि भारत में जून-सितंबर में मॉनसूनी बारिश लंबी अवधि के औसत की 93% हो सकती है, जिसमें 5% की कमी या अधिकता हो सकती है। प्रशांत महासागर औसत से अधिक गर्म हो गया है, जो मार्च-मई के दौरान के एल्नीनो के विकसित होने की 80% संभावना को व्यक्त करता है। (शेयर मंथन, 09 अप्रैल 2019)

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