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क्या शेयर बाजार में कमजोरी कम हुई या सिर्फ उतार-चढ़ाव बढ़ा है?

मौजूदा समय में शेयर बाजार जिस दौर से गुजर रहा है, वह काफी अनिश्चितताओं और उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है। लगातार छह हफ्तों से बाजार में कमजोरी बनी हुई है, हालांकि हाल के हफ्ते में गिरावट कुछ कम जरूर हुई है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि निफ्टी में लगभग आधा प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट देखने को मिली, लेकिन हर दिन का रुख खबरों और बयानों के आधार पर बदलता दिख रहा है। इस तरह का माहौल निवेशकों के लिए निर्णय लेना कठिन बना देता है, क्योंकि बाजार फिलहाल न तो पूरी तरह फंडामेंटल पर चल रहा है और न ही केवल टेक्निकल्स पर, बल्कि यह एक तरह से “इवेंट-ड्रिवन” या “न्यूज-ड्रिवन” मार्केट बन गया है।

ऐसे समय में स्पष्ट दिशा बताना मुश्किल जरूर है, लेकिन एक लंबी अवधि का नजरिया कुछ हद तक भरोसा देता है। इतिहास गवाह है कि चाहे 2008 का आर्थिक संकट हो या कोविड जैसी वैश्विक महामारी, हर मुश्किल दौर के बाद सरकारें और केंद्रीय बैंक मिलकर ऐसे कदम उठाते हैं जो अर्थव्यवस्था को संभालने में मदद करते हैं। भारत में भी पिछले एक साल में लिक्विडिटी, क्रेडिट ग्रोथ और टैक्स जैसे कई मोर्चों पर काम किया गया है, जिससे यह उम्मीद बनी रहती है कि हालात पूरी तरह बिगड़ने नहीं दिए जाएंगे। हालांकि, यह भी सच है कि अगर वैश्विक समस्याएं लंबी खिंचती हैं, जैसे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें या भू-राजनीतिक तनाव, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर जरूर पड़ेगा।

निवेश के लिहाज से इस समय दो तरह की रणनीतियां सामने आती हैं। पहला, जो निवेशक जोखिम से डरते हैं, उनके लिए बेहतर होगा कि वे थोड़ा इंतजार करें और निफ्टी के 24,000 के स्तर के ऊपर मजबूती से बंद होने का संकेत देखें। यह स्तर एक तरह का कॉन्फिडेंस इंडिकेटर बन सकता है, जिसके बाद बाजार में कुछ स्थिरता और स्पष्ट दिशा दिख सकती है। दूसरा, जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से बाजार में विश्वास रखते हैं, उनके लिए यह समय धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने का हो सकता है। यानी एक साथ पूरी राशि लगाने के बजाय 25 से 50% तक की रकम से शुरुआत करें और गिरावट में खरीदारी जारी रखें।

तकनीकी नजरिए से भी कुछ अहम स्तर उभरकर सामने आ रहे हैं। निफ्टी अगर 23,200–23,300 के ऊपर क्लोज देता है, तो इसमें शॉर्ट कवरिंग देखने को मिल सकती है, जिससे बाजार में तेज उछाल आ सकता है। हालांकि, असली मजबूती तब मानी जाएगी जब निफ्टी 23,700 से 24,000 के रेंज को पार कर स्थिर हो जाए। जब तक यह नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता बनी रह सकती है।

यह समय घबराने का नहीं बल्कि समझदारी से कदम उठाने का है। बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और किसी भी स्तर पर “जीरो रिस्क” जैसी स्थिति नहीं होती। इसलिए जरूरी है कि निवेशक अपनी जोखिम क्षमता को समझें, अनुशासन बनाए रखें और जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचें। सही रणनीति, धैर्य और लंबी अवधि का दृष्टिकोण ही इस तरह के अस्थिर बाजार में सफलता की कुंजी बन सकता है।

 



(शेयर मंथन, 07 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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