शेयर मंथन में खोजें

कॉटन में बरकरार रही सकती है मंदी, ग्वार सीड पर बिकवाली का दबाव - एसएमसी

व्यापार युद्ध के बढ़ते भय के कारण घरेलू बाजार में कॉटन वायदा की कीमतों की तेजी पर रोक जारी रह सकती है।

हाजिर बाजारों में खरीदारों और विक्रेताओं की ओर से सावधनी के कारण सुस्त कारोबार हो रहा है। इसलिए मई कॉन्ट्रैक्ट की कीमतें 21,150-21,400 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आईसीई कॉटन वायदा (जुलाई) की कीमतें 65-68 के दायरे में सीमित दायरे में रह सकती है। उत्पादन में बढ़ोतरी के बीच गहराते व्यापार युद्ध के कारण अमेरिकी भंडार के बढ़ कर दशक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने की संभावना है।
ग्वार सीड वायदा (जून) पर बिकवाली का दबाव रहने की संभावना है और कीमतें 4,350-4,335 रुपये के स्तर पर लुढ़क सकती है, जबकि ग्वारगम वायदा (जून) की कीमतों में 8,745-8,700 रुपये तक गिरावट हो सकती है। राजस्थान कृषि विभाग द्वारा 2019-20 में ग्वार का उत्पादन मौजूदा वर्ष के अनुमानित 10.3 लाख टन की तुलना में 45.5% की बढ़ोतरी के अनुमान के बाद सेंटीमेंट कमजोर हो गया है। आगामी सीजन में ग्वार की उत्पादकता पिछले वर्ष के 334 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की तुलना में 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है।
गेहूँ वायदा (जून) की कीमतों में 1,965 रुपये के सहारा से ऊपर तेजी बरकरार रहने की संभावना है। सरकार के खुले बाजार में बिक्री योजना के तहत बेचे जा रहे गेहूँ की कीमत हाजिर कीमत की तुलना में अधिक होने के कारण हाजिर बाजारों में गेहूँ की माँग में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मक्का वायदा की कीमतें हर हफ्ते रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच रही हैं और आगे भी तेजी का रुझान जारी रह सकता है। पशु आहार निर्माताओं की ओर से अधिक खरीदारी के कारण जून कॉन्ट्रैक्ट की कीमतें 1,970-2,000 रुपये तक पहुँच सकती है। (शेयर मंथन, 20 मई 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख