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कॉटन में सुस्ती, चने में गिरावट की संभावना - एसएमसी

कॉटन वायदा (जुलाई) की कीमतों के फिर से 15,850-16,300 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
भंडार में बढ़ोतरी के कारण कीमतों पर दबाव रह सकता है। धीमी गति से रिकवरी का मुख्य कारण कपड़े और परिधनों के क्षेत्रों में माँग में सुस्ती रही है। इसके अलावा, प्रमुख उत्पादक देशों से प्रतिस्पर्ध के कारण चीन को भारत से सूती धागे के निर्यात में गिरावट हुई है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में, अमेरिका द्वारा चीन के साथ दूसरे चरण की वार्ता शुरु नहीं करने की घोषणा करने के बाद आईसीई कॉटन को कम माँग का दबाव महसूस करना पड़ रहा है। विश्व बाजार में, कपास की खुदरा माँग कम हो गयी है क्योंकि महामारी के अधिकतम प्रसार के दौरान उपभोक्ताओं के घर के अंदर रहने के कारण आर्थिक रूप से चोट लगी है और कपड़े पर खर्च करने के लिए बहुत कम फंड बचा हैं।
चना वायदा (अगस्त) की कीमतें नरमी के रुझान के साथ 4,040-4,140 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है। कमजोर फिजिकल माँग और मिलों की ओर से कम माँग के कारण सुस्ती का रुझान देखी जा रहा है। इसके अलावा, नेफेड द्वारा बिकवाली और उच्च स्तर पर मुनाफा वसूली के कारण कीमतों की बढ़त पर रोक लग रही है। साथ ही मौजूदा खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि के 24.49 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 64.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में हुई है।
मेंथा तेल वायदा (जुलाई) की कीमतों में नरमी का रुझान रह सकता है और आने वाले दिनों में कीमतें 950-940 रुपये तक लुढ़क सकती है। नयी फसलों से आवक अधिक हो रही है और इसके विपरीत चीन की ओर से निर्यात माँग बहुत कम है। (शेयर मंथन, 20 जुलाई 2020)

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