शेयर मंथन में खोजें

सरसों और सोया तेल में तेजी का रुझान - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (अगस्त) की कीमतों के 3,820-3,870 रुपये के दायरे में स्थिर कारोबार करने की संभावना है।

काउंटर पहले से ही इस सीजन में आश्चर्यजनक रूप से अधिक आपूर्ति के दबाव में कारोबार कर रहा है और आगे भी माँग भी बाधित हो सकती है क्योंकि विदेश व्यापार महानिदेशालय ने 1 अप्रैल से शुरू किये गये निर्यातों के लिए अपने पोर्टल पर एमईआईएस के दावों के ऑनलाइन पंजीकरण को रोक दिया है। इससे सोयामील का निर्यात बंद हो जायेगा।
सरसों वायदा की कीमतों में तेजी का रुझान है और घरेलू खपत में अचानक वृद्धि के बीच कम आपूर्ति और सरसों के तेल की माँग बढ़ने के कारण हर हफ्ते तीन साल के एक नये उच्च स्तर पर पहुँच रही है। किसानों के पास कोई स्टॉक नहीं बचा है और नयी सीजन की फसल की आवक में अभी 6-8 महीने की देरी है, इसलिए आने वाले दिनों में सरसों की कीमतों में तेजी रहने की संभावना है। इसलिए कीमतों की प्रत्येक गिरावट के बाद 5,050-5,070 रुपये के लक्ष्य को देखते हुये, इस तिलहन की खरीदारी की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से सकारात्मक रुझान पर खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी का रुझान जारी रहने की संभावना है। डेलियन एक्सचेंज में पॉम ऑयल और सोया तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और जुलाई महीने में कम उत्पादन एवं भंडार में कमी के अनुमान के कारण बर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स पर सीपीओ की कीमतों में लगभग 1% की वृद्धि देखी गयी है। डेलियन एक्सचेंज में पॉम ऑयल की कीमतों में 2.89% और सोया तेल की कीमतों में 1.13% की बढ़ोतरी हुई है।

सीबोट में सोया तेल की कीमतों में 0.51% की बढ़ोतरी हुई है। सोया तेल (अगस्त) की कीमतों में 875-885 रुपये तक बढ़त दर्ज की जा सकती है, और सीपीओ (अगस्त) की कीमतों में 740-750 रुपये के स्तर तक बढ़ोतरी हो सकती है।

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख