शेयर मंथन में खोजें

सोया तेल में बाधा, सोयाबीन के सीमित दायरे में रहने के संकेत - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 3,780-3,840 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

कमजोर उपलब्धता के बीच, प्लांट डिलीवरी के लिए सोयाबीन की कीमतें बढ़कर 3,900 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुँच गयी है। कमजोर आवक के कारण सोयाबीन की कीमतें 3,750-3,850 प्रति क्विंटल पर बंद हुई है। घरेलू माँग में सुधर के कारण सोया डीओसी की कीमतें 3,000 रुपये प्रति टन रही। अगस्त में सूखे मौसम के कारण फसल को नुकसान पहुँचने की आशंका से सीबोट में सोयाबीन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और कीमतें लगभग सात महीने के उच्च स्तर के नजदीक पहुँच गयी। अमेरिका के कृषि विभाग के अनुसार 2020-21 के दौरान चीन में डिलीवरी के लिए निर्यातकों ने 192,000 टन यू.एस. सोयाबीन की बिक्री की।
सरसों वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 5,130 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 5,200-5,220 रुपये के स्तर पर पहुँचने की संभावना है। कम फसल का अनुमान, त्यौहार और मौसमी माँग और नेफेड द्वारा कीमतों में वृद्धि के कारण सरसों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई हैं। कुल मिलाकर बाजार की अनुकूल स्थितियों ने स्टॉकिस्टों और किसानों को बेहतर कीमतों के लिए स्टॉक रखने के लिए प्रोत्साहित किया। बाजार सूत्रों के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है क्योंकि अगली फसल सात महीने बाद आयेगी। किसान अपनी फसल को अपनी आर्थिक जरूरत के अनुसार बेच रहे हैं।
सोया तेल (सितम्बर) की कीमतों को 877 रुपये के स्तर पर बाधा का सामना करना पड़ सकता है, जबकि सीपीओ (अगस्त) की कीमतें 750-765 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है। त्यौहारी सीजन के बावजूद कमजोर माँग और सस्ते आयातित तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण इंदौर की मंडियों में सोया और अन्य तेलों की कीमतों की बढ़त पर रोक लग गयी है। प्रतिद्वंद्वी खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी के रुझान के कारण मलेशियाई पॉम तेल वायदा की कीमतें कल एक हफ्ते से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर बंद हुई जबकि निवेशकों ने 1-20 अगस्त के निर्यात आँकड़ों को जारी होने से पहले सावधनी से कारोबार किया। कार्गो सर्वेक्षणकर्ताओं द्वारा आज मलेशिया पॉम ऑयल के 1-20 अगस्त के निर्यात आँकडें जारी करने की उम्मीद है। (शेयर मंथन, 20 अगस्त 2020)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख