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सरसों और सोया तेल की कीमतों में गिरावट के संकेत - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 3,780-3,840 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

कमजोर उपलब्धता के बीच, प्लांट डिलीवरी के लिए सोयाबीन की कीमतें बढ़कर 3,725-3,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुँच गयी है। अगस्त में सूखे मौसम के कारण फसल को नुकसान पहुँचने की आशंका से सीबोट में सोयाबीन की कीमतों में 1% की बढ़ोतरी हुई है और लेकिन अनुमान से अधिक उत्पादकता और कम होते निर्यात के कारण बढ़त सीमित रही। अमेरिका के कृषि विभाग के अनुसार 2020-21 के दौरान चीन में डिलीवरी के लिए निर्यातकों ने 1,92,000 टन अमेरिका सोयाबीन की बिक्री की।
सरसों वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 5,185 रुपये से नीचे ही रहने की संभावना है। अधिक कीमतों पर कम खरीदारी के कारण सरसों की कीमतें निमाड़ में 4,500-4,550 रुपये प्रति क्विंटल और जयपुर में 5,300-5,305 रुपये हो गयी है। देशभर में कल सरसों की आवक 1.25 लाख बैग दर्ज की गयी। राजस्थान में 70,000 बैगों की आवक हुई, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 15,000 बैग, मप्र-10,000 बैग, गुजरात और हरियाणा प्रति पंजाब-5,000 बैग, जबकि अन्य जगहों से 20,000 बैग की आवक हुई है।

सोया तेल (सितम्बर) की कीमतों में 860 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है जबकि सीपीओ (अगस्त) की कीमतें 745 रुपये तक गिरावट दर्ज कर सकती है। त्यौहारी सीजन के बावजूद कमजोर मांग और सस्ते आयातित तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण इंदौर की मंडियों में सोया और अन्य तेलों की कीमतों की बढ़त पर रोक लग गयी है। खबरों में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने राज्यों से देश भर के खाद्य तेलों में मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए कहा है। इसने राज्यों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे वनस्पति तेल रिफाइनरियों, तेल सम्मिश्रण इकाइयों और खाद्य वनस्पति तेलों को बनाने वाली अन्य उत्पादन इकाइयों में मिलावटखोरों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए उचित कार्रवाई करें। (शेयर मंथन, 21 अगस्त 2020)

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