हल्दी में बढ़त, जीरे की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में पिछले हफ्ते 3% की उछाल दर्ज की गयी है जो निर्यात के साथ-साथ घरेलू माँग में भी बढ़ोतरी के कारण हुई।

कीमतों के 7,930 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 8,300 रुपये तक बढ़त दर्ज करने की संभावना हैं। आंध्र प्रदेश में प्रमुख हाजिर बाजार निजामाबाद में, कीमतें पिछले सप्ताह 4% बढ़कर 7,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गयी। वर्तमान में कीमतें पिछले साल की तुलना में अधिक हैं, क्योंकि हल्दी की माँग दुनिया भर में इसके औषधीय और अन्य प्रतिरक्षा संबंधी लाभों के कारण बढ़ी है। हल्दी की बुवाई वाले क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हुई है और अगले सीजन में अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। 2021 के पहले 6 महीनों में, हल्दी का निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3% कम होकर 77,300 टन हो गया, लेकिन आने वाले महीनों में यह अधिक हो सकता है।
जीरा वायदा (अक्टूबर) की में नरमी का रुझान रहने की संभावना है और कीमतें 15,000 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 14,800 रुपये तक लुढ़क सकती है। व्यापारियों और किसानों के पास पर्याप्त स्टॉक के कारण उच्च स्तर पर कीमतों पर दबाव रह सकता है। सितंबर से नवंबर के दौरान पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य बारिश के पूर्वानुमान से गुजरात और राजस्थान में जीरा की बुवाई में बढ़ोतरी हो सकती है। 2021 (जनवरी-जून) में, देश ने पिछले साल की समान अवधि के 1.3 लाख टन की तुलना में 1.50 लाख टन से अधिक जीरा निर्यात किया है।
धनिया वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 8,600 रुपये के उच्च स्तर पर पहुँचने के बाद हुई मुनाफा वसूली के कारण कीमतें फिर से 8,278 रुपये के स्तर पर आ गयी। यदि कीमतें 8,240 रुपये के सहारा स्तर से नीचे टूटती है तो 8,150 रुपये तक गिरावट दर्ज कर सकती है। पिछले सप्ताह राजस्थान में हाजिर कीमतों में थोड़ा बदलाव हुआ है क्योंकि मौजूदा कीमतों पर माँग सामान्य बनी हुई है। थोक खरीदार और मसाला मिल मालिक बड़ी खरीदारी से परहेज कर रहे हैं। अगस्त में, शुष्क मौसम के कारण कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन मानसून की बारिश फिर से शुरू होने से कीमतों पर दबाव पड़ा है। निर्यात माँग में वृद्धि से कीमतों को समर्थन मिल सकता है। (शेयर मंथन, 13 सितम्बर 2021)

 

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