शेयर मंथन में खोजें

सोयाबीन, आरएम सीड में बाधा, सोया तेल को 1,290 रुपये रह सकता है सहारा - एसएमसी

उच्च स्तर पर मुनाफा वसूली के कारण सोयाबीन वायदा (नवम्बर) की कीमतों में कल 1.7% की गिरावट दर्ज की गयी है।

कीमतें 5,500 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 5,480-5,700 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है। नये सीजन में सोयाबीन मंडियों में पहुँचना शुरू हो गया है और थोक खरीदार आवक दबाव बढ़ने से पहले आक्रामक खरीद के लिए सतर्क हैं। आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयामील का आयात और कच्चे और रपफाइंड सोया तेल के आयात शुल्क में कमी को भी कीमतों में गिरावट के मुख्य कारणों के रूप में देखा जा रहा है। भारत का सोयाबीन उत्पादन पिछले साल के 8.9 मिलियन टन की तुलना में 10 मिलियन टन होने का अनुमान है।
आरएम सीड वायदा (नवम्बर) की कीमतें 8,500 रुपये पर बाधा के साथ 8,350-8,550 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है। देशभर में सरसों की आवक बढ़ गयी है। कारोबारियों के मुताबिक मंडियों में सोयाबीन की नयी आवक शुरू होने से पेराई संयंत्रों की खरीद धीमी हो गयी है। दूसरी ओर शुल्क में कमी से खाद्य तेल के आयात में वृद्धि हुई है जिससे सरसों पर भी दबाव पड़ा है। उच्च स्तर पर मुनाफा वसूली के कारण खाद्य तेल की कीमतों में नरमी के रुझान के साथ कारोबार हुआ। सितम्बर महीने में कम उत्पादन अनुमान और भंडार में कमी के कारण मलेशियाई पाम तेल वायदा की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
सोया तेल वायदा (नवम्बर) की कीमतों के 1,290 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 1,280-1,345 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है, जबकि सीपीओ वायदा (अक्टूबर) की कीमतों के 1,120-1,180 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। (शेयर मंथन, 08 अक्टूबर 2021)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख