शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 47,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 47,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 70,000 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 69,300 रुपये पर सहारा रह सकता है।

पिछले सत्र में तीन सप्ताह के शिखर पर पहुँचने के बाद आज सोने की कीमतों में गिरावट हुई, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून नीति बैठक से मिनटों के जारी होने से पहले डॉलर में उछाल के कारण कीमतों पर दबाव पड़ा। सोने की हाजिर कीमतें 0.1% की गिरावट के साथ 1,795.39 डॉलर प्रति औसतन के नजदीक कारोबार कर रही हैं। अमेरिकी सोना वायदा 0.1% बढ़कर 1,795.80 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर सूचकांक पिछले सप्ताह तीन महीने के उच्च स्तर के करीब पहुँच गया जिससे अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना अधिक महँगा हो गया। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चौंकाने वाले रुझान के बाद इस सप्ताह बाजार का फोकस फेड की नवीनतम बैठक के मिनट पर है जो आज जारी होने वाला है। अमेरिकी सेवा उद्योग गतिविधि जून में मध्यम गति से बढ़ी है, संभवतः श्रम और कच्चे माल की कमी से बाधित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अधूरे काम का ढेर लगा रहा।

बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी की यील्ड चार महीने से अधिक समय में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गयी। मंगलवार को एक सर्वेक्षण के अनुसार जर्मनी में निवेशकों का सेंटीमेंट जुलाई में अपेक्षा से कहीं अधिक कम हो गया है, लेकिन यह बहुत उच्च स्तर पर बनी रही, क्योंकि एक मजबूत आर्थिक सुधार की उम्मीदें बढ़ीं है। चांदी की कीमतें 0.2% की गिरावट के साथ 26.08 डॉलर प्रति औसतन पर आ गयी। (शेयर मंथन, 07 जुलाई 2021)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख