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सर्राफा

डॉलर के मजबूती से सर्राफा की कीमतों में बढ़त की उम्मीद - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

डॉलर के मजबूत होने के कारण सोने की कीमतें 1,800 डॉलर प्रति औसतन के प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तर के पास नीचे सुस्त कारोबार कर रही है जबकि फेडरल रिजर्व के भविष्य के नीतिगत रुख के संकेतों के लिए निवेशकों की नजर अमेरिकी रोजगार की रिपोर्ट है।

सर्राफा में बरकरार रह सकती है नरमी - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 46,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 46,300 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 65,500 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 64,300 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 48,000 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 47,380 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 67,500 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 66,000 रुपये पर सहारा रह सकता है।

डॉलर के स्थिर रहने से आज सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 48,200 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 47,800 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 68,100 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 67,400 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा बाजार में वृद्धि की संभावना - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आर्थिक समर्थन को कम नहीं करने और निकट अवधि में ब्याज दरों में वृद्धि नहीं करने के संकेत के कारण पिछले सप्ताह में सोने की कीमतों में 1% से अधिक की वृद्धि हुई।

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निवेश मंथन पत्रिका

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    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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