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सर्राफा

सर्राफा में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 48,400 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 47,900 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 68700 के स्तर पर बाधा के साथ 67,500 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा में बरकरार रह सकती है तेजी - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 47,700 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 47,400 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 66,700 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 65,900 रुपये पर सहारा रह सकता है।

फेडरल रिजर्व के फैसले से मिलेगी सर्राफा बाजार को दिशा - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल द्वारा नीति को सख्त करने की जल्दीबाजी में नहीं होने के बयानों से निवेशकों का डर शांत होने के बाद मुद्रास्फीति से बचाव के रूप में माँग बढ़ने से सोने की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गयी।

सर्राफा में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 47,700 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 47,300 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 66,500 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 65,900 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 48,100 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 47,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में 69,700 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 68,800 रुपये पर सहारा रह सकता है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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