शेयर मंथन में खोजें

इस एसटीटी वृद्धि से एकदम घट जायेगा फ्यूचर कारोबार : नितिन कामत

प्रमुख ब्रोकिंग फर्म जेरोधा के संस्थापक नितिन कामत ने बजट में एसटीटी बढ़ाये जाने के चलते वायदा कारोबार (Futures and Options), और खास कर फ्यूचर कारोबार काफी घट जाने की आशंका जतायी है।

कामत ने सोशल मीडिया पर अपनी एक टिप्पणी में लिखा है कि "कारोबार की 95% मात्रा पहले से ही ऑप्शन में है, और एसटीटी वृद्धि से यह हिस्सा और बढ़ने वाला है। क्यों? इसलिए, कि इसका असर अधिकांशतः फ्यूचर पर है, जबकि फ्यूचर की तुलना में ऑप्शन कहीं ज्यादा सटोरिया प्रकृति के हैं।"

कामत इस टिप्पणी में कहते हैं, "मुझे नहीं पता कि एसटीटी में वृद्धि के पीछे वस्तुतः क्या तर्क है। पर यदि इसका उद्देश्य एफऐंडओ (F&O) में सटोरिया गतिविधियों को घटाना है, तो मुझे नहीं लगता कि इसका ऐसा असर होगा।" वे आगे कहते हैं, "यदि सरकार सट्टेबाजी को कम करना चाहती है, तो उत्पाद अनुकूलता (प्रोडक्ट सूटेबिलिटी) यानी किसे ट्रेड करने की अनुमति हो - इसका मानदंड तय करना उचित रास्ता है। मैं जानता हूँ कि यह अलोकप्रिय विचार है, पर इससे ब्रोकरों और ट्रेडरों के बीच काफी अनिश्चितता दूर हो सकेगी। यह ज्यादा अच्छा तरीका होगा, बजाय इसके कि हजारों एसटीटी वृद्धि के जरिये मृत्यु दी जाये!"

एसटीटी में निरंतर वृद्धि से जुड़ी समस्या को रेखांकित करते हुए कामत कहते हैं, "एक समय आने पर आप कारोबारी मात्रा पर काफी असर पड़ता हुआ देखेंगे, क्योंकि लेनदेन की लागत ट्रेडिंग को अव्यावहारिक बना देगी। फ्यूचर में ऐसा दिखना एक तरह से शुरू हो चुका है।" (शेयर मंथन, 2 फरवरी 2026)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख