शेयर मंथन में खोजें

बेस मेटल की कीमतों में बढ़ोतरी की संकेत - एसएमसी

बेस मेटल की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना हैं।

तांबे की कीमतें 524 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 533 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है। शंघाई में आज बेस मेटल की कीमतों में बढ़त देखी जा रही है जबकि एलएमई में अधिकांश बेस मेटल की कीमतों में नरमी रही। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय सहायता को लेकर बातचीत फिर से शुरू करने के बाद डॉलर के कमजोर होने और औद्योगिक धातु के शीर्ष उत्पादक चिली में खनिकों की हड़ताल से शुक्रवार को तांबे की कीमतें बढ़कर दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुँच गयी। बाजार चीन से इस सप्ताह जारी होने होने वाले ऋण, कुल सामाजिक वित्तपोषण और व्यापार के आँकड़ों की जाँच करेगा। दुनिया की सबसे बड़ी तांबे की खान, एस्कॉन्डिडा ने शुक्रवार को बीएचपी के प्रस्तावित नये श्रम समझौते को खारिज कर दिया जिससे हड़ताल की आशंका से तांबे की कीमतों को मदद मिल सकती है।

जिंक की कीमतें 193 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 197 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती हैं। अनुमान से कम लाभ और जिंक कंसेंटेंट की कम आपूर्ति के कारण जिंक स्मेल्टर जिंक का उत्पादन नही बढ़ा रहे है जिससे कीमतों को मदद मिल रही है। लेड की कीमतें 147 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 150 रुपये, निकल की कीमतों में तेजी रह सकती है और कीमतों को 1,080 रुपये के पास समर्थन के साथ 1,120 रुपये के स्तर पर बाधा रह सकता है। चीन में स्टेनलेस स्टील मिलों द्वारा अक्टूबर में अधिक उत्पादन के कारण निकट अवधि में प्राथमिक निकल की माँग अधिक होने की उम्मीद है।
एल्युमीनियम (अक्टूबर) की कीमतें 147 रुपये के पास सहारा के साथ 152 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती हैं। (शेयर मंथन, 12 अक्टूबर 2020)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख