सोयाबीन वायदा (जुलाई) की कीमतों में 3,720 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 3,600 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 3,300-3,290 रुपये तक लुढ़कने की संभावना है।
जितेंद्र, बैतूल : सोयाबीन के भाव क्या अगले 1-2 महीने में कम होंगे?
सोयाबीन (फरवरी) वायदा कीमतों में 3,475 रुपये पर सहारा के साथ तेजी का रुझान रहने की संभावना है।
हल्दी वायदा (दिसंबर) की कीमतों में 6,500 रुपये तक नरमी का रुझान रहने की संभावना है।
एसएमसी कमोडिटीज ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में जिक्र किया है कि सोयाबीन वायदा (जनवरी) की कीमतों के फिर से 3,310-3,410 रुपये के दायरे में ही बरकरार रहने की संभावना है।
सोयाबीन की कीमतें इंदौर में लगतार बढ़त दर्ज कर रही है। अमेरिकी सोयाबीन की कीमतों में कल भी बढ़ोतरी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है।
किसानों द्वारा हाजिर बाजारों में सोयाबीन की धीमी बिकवाली के कारण घरेलू बाजार में पिछले दो हफ्ते से सोयाबीन की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है।
सोयाबीन वायदा (सितंबर) की कीमतों के 3,645 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ 3,720 रुपये पर पहुँचने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (जून) में 3,675-3,700 रुपये के स्तर के नजदीक खरीदारी जारी रह सकती है।
नयी फसल के नुकसान की खबरों और बेहतर पेराई मार्जिन के कारण सोयामील के अधिक निर्यात की संभावनाओं से निकट अवधि में सोयाबीन वायदा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (जून) की कीमतों में 3,710 रुपये के स्तर सहारे के साथ 3,760 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की उम्मीद है।
सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 3,800 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 3,900-3,950 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
सोयाबीन की कीमतों में इंदौर में हुई है लेकिन माँग के कारण कीमतों को मदद मिल रही है।
सोयाबीन की कीमतों में इंदौर में गिरावट हुई है लेकिन बढ़ती माँग के कारण कीमतों को मदद मिल रही है।
सोयाबीन की कीमतों में इंदौर में बढ़ोतरी हुई है लेकिन बढ़ती माँग के कारण कीमतों को मदद मिल रही है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।