विजय सिंह जानना चाहते हैं कि उन्हें हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज (Hexaware Technologies) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि मौजूदा समय में आईटी सेक्टर एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है। तकनीक में तेजी से बदलाव, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के कारण कई पारंपरिक आईटी कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल को दोबारा परिभाषित करने की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में आने वाले दो से तीन वर्षों तक इस सेक्टर को खुद को फिर से स्थापित करने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
इसी कारण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब तक सेक्टर में स्पष्टता नहीं आती, तब तक किसी एक आईटी कंपनी में निवेश करने से पहले काफी सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि अभी यह तय करना मुश्किल है कि कौन-सी कंपनी इस बदलाव में आगे निकलकर आएगी और कौन पीछे रह जाएगी। ऐसे माहौल में कई निवेशक आईटी सेक्टर के म्यूचुअल फंड या सेक्टर फंड के जरिए धीरे-धीरे निवेश (SIP) करने की रणनीति अपनाते हैं, जिससे जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है और फंड मैनेजर बदलती परिस्थितियों के अनुसार पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं।
अगर Hहेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज के शेयर की बात करें तो इसमें पहले ही काफी बड़ा करेक्शन आ चुका है। यह शेयर लगभग 730-750 रुपये के ऊपरी स्तर से गिरकर काफी नीचे आ चुका है। कंपनी का पी/ई मल्टीपल जो पहले 45–50 के आसपास पहुंच गया था, अब घटकर 20 से भी नीचे आ चुका है। इसका मतलब है कि वैल्यूएशन में काफी हद तक सुधार या नॉर्मलाइजेशन हो चुका है। हालांकि इसके बावजूद बाजार में चिंता बनी हुई है क्योंकि निवेशक भविष्य की ग्रोथ को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
फंडामेंटल के स्तर पर देखें तो कंपनी की ग्रोथ अभी पूरी तरह रुकी हुई नहीं है। सालाना आधार पर लगभग 15% से 18% तक की ग्रोथ अभी भी दिखाई दे रही है। लेकिन कोविड के दौरान आईटी सेक्टर में वैल्यूएशन असामान्य रूप से बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे, इसलिए अब जो गिरावट देखने को मिल रही है वह काफी हद तक उसी वैल्यूएशन के सामान्य होने की प्रक्रिया का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय शेयर की कीमत से ज्यादा उसके वैल्यूएशन पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि कीमत में गिरावट असल में वैल्यूएशन करेक्शन को ही दर्शाती है।
आईटी सेक्टर में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और इस कारण निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। अगर कोई निवेशक इस सेक्टर में अवसर तलाशना चाहता है तो उसे लंबी अवधि का नजरिया रखना होगा और यह समझना होगा कि किसी भी इंडस्ट्री में बड़े बदलाव के बाद बिजनेस को नए ढांचे में ढलने में दो से तीन साल का समय लग सकता है। इसलिए निवेश का निर्णय ले।
(शेयर मंथन, 06 मार्च 2026)
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