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एफडी से बेहतर टैक्स फायदा? एक्सपर्ट से समझिए आर्बिट्रेज फंड्स का खेल

शेयर बाजार में निवेश करते समय अधिकांश निवेशक ऐसा विकल्प तलाशते हैं जिसमें जोखिम अपेक्षाकृत कम हो और रिटर्न भी स्थिर मिल सके। इसी संदर्भ में म्यूचुअल फंड की एक खास श्रेणी आर्बिट्रेज फंड्स है, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाला माना जाता है।

हालांकि पूंजी बाजार में पूरी तरह जोखिम-मुक्त निवेश जैसा कुछ नहीं होता, लेकिन तुलना के लिहाज से आर्बिट्राज फंड्स में जोखिम काफी सीमित माना जाता है। आर्बिट्राज फंड का काम करने का तरीका काफी दिलचस्प होता है। इसमें फंड मैनेजर किसी शेयर को कैश मार्केट में खरीदते हैं और उसी शेयर के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को फ्यूचर्स मार्केट में बेच देते हैं। यानी एक तरफ स्टॉक में लॉन्ग पोजीशन और दूसरी तरफ फ्यूचर में शॉर्ट पोजीशन बनाई जाती है। इससे पूरी पोजीशन हेज्ड हो जाती है और कैश व फ्यूचर के बीच जो कीमत का अंतर होता है, वही इस रणनीति का मुनाफा बनता है। इस कारण बाजार ऊपर जाए या नीचे, फंड को कीमत के उतार-चढ़ाव का सीधा जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

आमतौर पर आर्बिट्राज फंड्स का रिटर्न 6% से 7% के आसपास देखा जाता है। यही वजह है कि कई लोग इसकी तुलना बैंक फिस्स डिपॉजिट यानी बैंक एफडी से करते हैं। हालांकि यहां बड़ा फर्क टैक्स का होता है। एफडी से मिलने वाला ब्याज निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है, जबकि आर्बिट्राज फंड इक्विटी फंड की तरह टैक्स ट्रीटमेंट पाते हैं। अगर निवेश एक साल से अधिक समय तक रखा जाए तो टैक्स अपेक्षाकृत कम लगता है, जिससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न कई मामलों में एफडी से बेहतर हो सकता है।

लिक्विडिटी के मामले में भी आर्बिट्राज फंड्स काफी सुविधाजनक होते हैं। बैंक एफडी में अक्सर तय समय से पहले पैसा निकालने पर पेनल्टी लगती है और ब्याज दर भी घट जाती है। वहीं आर्बिट्राज फंड में निवेशक जरूरत पड़ने पर आसानी से रिडेम्प्शन कर सकता है और सामान्यतः दो-तीन दिनों में पैसा खाते में आ जाता है। इस कारण यह उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी हो सकता है जिन्हें कम समय के लिए पैसा पार्क करना हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी निवेशक को अपने पैसे की कम से कम दो महीने तक जरूरत नहीं है तो वह इस तरह के फंड में निवेश पर विचार कर सकता है। इस अवधि में फंड मैनेजर को ट्रेडिंग और रोलओवर के जरिए बेहतर रिटर्न निकालने का मौका मिल जाता है।

हालांकि आर्बिट्राज फंड में भी फंड मैनेजमेंट की भूमिका बेहद अहम होती है। अलग-अलग फंड्स के रिटर्न में अंतर इसलिए देखने को मिलता है क्योंकि फंड मैनेजर यह तय करते हैं कि किस सेक्टर, किस मार्केट कैप और किस स्टॉक में अवसर बेहतर है। साथ ही कॉरपोरेट एक्शन, डिविडेंड और बाजार की वोलैटिलिटी को समझकर ट्रेडिंग करने से रिटर्न में सुधार किया जा सकता है। यही कारण है कि एक ही श्रेणी के फंड्स में भी प्रदर्शन का अंतर देखने को मिलता है। आर्बिट्राज फंड्स उन निवेशकों के लिए एक संतुलित विकल्प हो सकते हैं जो कम जोखिम के साथ स्थिर रिटर्न चाहते हैं और साथ ही बैंक एफडी के मुकाबले बेहतर टैक्स दक्षता और लिक्विडिटी का लाभ उठाना चाहते हैं।


(शेयर मंथन, 06 मार्च 2026)

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