होटल सेक्टर को लेकर निवेशकों के मन में फिलहाल कई सवाल हैं, खासकर वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक तनाव के बीच।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि घरेलू यानी डोमेस्टिक पर्यटन के लिहाज से होटल सेक्टर में ज्यादा चिंता की बात नहीं है। भारत में मिडिल क्लास और हाई मिडिल क्लास की ट्रैवल डिमांड लगातार बढ़ रही है, जिससे डोमेस्टिक होटल इंडस्ट्री को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि जिन होटलों का बिजनेस विदेशी पर्यटकों पर ज्यादा निर्भर है, खासकर प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट वाले फाइव स्टार होटल, उन्हें थोड़े समय के लिए दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि विदेशी पर्यटक यात्रा करते समय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों को ज्यादा ध्यान में रखते हैं।
वहीं दूसरी तरफ, भारत के भीतर यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और होटल कमरों की सप्लाई अभी भी डिमांड के मुकाबले कम है। सामान्य तौर पर होटल इंडस्ट्री में कमरे (Keys) की सप्लाई करीब 4% की दर से बढ़नी चाहिए, लेकिन फिलहाल यह करीब 2% की दर से ही बढ़ रही है। इसका मतलब है कि अगले दो साल के मध्यम अवधि के नजरिए से होटल सेक्टर में बड़ी समस्या नजर नहीं आती। कोविड के बाद भी देखा गया कि जैसे ही हालात सामान्य हुए, ट्रैवल की पेंट-अप डिमांड अचानक बढ़ गई और होटल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा हुआ।
निवेश के नजरिए से देखें तो होटल सेक्टर पूरी तरह सस्ता नहीं है, इसलिए लमसम निवेश करने से पहले वैल्यूएशन पर जरूर ध्यान देना चाहिए। निवेशकों को ऐसे होटल कंपनियों को चुनना चाहिए जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत हो और जिनकी डिमांड मुख्य रूप से डोमेस्टिक बाजार से आती हो। कुल मिलाकर, थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन अगले दो साल की ट्रेजेक्टरी में होटल सेक्टर की ग्रोथ स्टोरी बरकरार रहने की संभावना दिखती है। इसलिए निवेशकों को धैर्य रखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए।
(शेयर मंथन, 14 मार्च 2026)
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