शेयर मंथन में खोजें

इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को मिले टाटा समूह से निवेश के संकेत

tata steelइलेक्ट्रोस्टील स्टील्स (Electrosteel Steels) ने कहा है कि उसे टाटा समूह (Tata Group) और साथ ही सिंगापुर के वित्तीय निवेशक से कंपनी में निवेश के लिए संकेत मिले हैं।

कपंनी ने एक बयान में कहा कि हमारे बैंकर्स और कंपनी प्रस्ताव पर विचाक कर रहे हैं। पिछले महीने स्टॉक एक्सचेंज ने टाटा स्टील से इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के साथ बातचीत के समाचार पर एक स्पष्टीकरण की मांग की थी। जिसके जवाब में टाटा ने कहा कि अपनी व्यापार रणनीति के तहत वह नियमित रूप से विकास के अवसरों का मूल्यांकन करती रहती है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारी कंपनी बाजार की अटकलों पर टिप्पणी नहीं करने की नीति का अनुसरण करती है।

इलेक्ट्रोस्टील झारखंड के बोकारो जिले में एक 2.51 लाख टन एकीकृत संयंत्र (integrated  plant)  स्थापित कर रही है। 31 मार्च 2014 की स्थिति के अनुसार इसका कर्ज 10,000 करोड़ रुपये के करीब था और ऋण-इक्विटी अनुपात 1.76 से बढ़कर 4.72 पर पहुँच गया था। इलेक्ट्रोस्टील ने कहा कि मार्च 2015 के अन्त में इसके खर्च, 1,831 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री से 10% अधिक है। कंपनी को 969 करोड़ रुपये की बाजार पूंजी के साथ, वित्त वर्ष 2015 में 183 करोड़ रुपये के राजस्व पर 62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हल्की तेजी से शुरु आज बाजार में इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के शेयर 0.13 रुपये या 3.23% की बढ़त के साथ 4.15 पर हैं। (शेयर मंथन, 12 जून 2015)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख