शेयर मंथन में खोजें

हिस्सा बेचने की अटकलों के बीच एस्सार ऑयल (Essar Oil) के शेयर में भारी उतार-चढ़ाव

रूस की कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) को अपनी लगभग आधी हिस्सेदारी बेचने के बारे में छपी खबर पर एस्सार ऑयल के स्पष्टीकरण के बीच आज एस्सार ऑयल के शेयर भाव में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एस्सार ऑयल ने एक्सचेंजों को दिये एक बयान में स्पष्ट किया है कि 'आज की तिथि तक कंपनी में ऐसी कोई घटना या सूचना नहीं है, जिसे लिस्टिंग समझौते की धारा 36 के तहत एक्सचेंज को बताना आवश्यक हो।' यह दिलचस्प है कि कंपनी ने अपने इस स्पष्टीकरण में कहीं भी इस बात को नकारा नहीं है कि वह रोसनेफ्ट से हिस्सा बेचने के बारे में बातचीत कर रही है। यह स्पष्टीकरण केवल इतना जाहिर करता है कि अगर ऐसी कोई बातचीत चल रही हो तो वह अपने अंजाम तक नहीं पहुँची है। 
गौरतलब है कि हिस्सेदारी बेचे जाने की अटकलों से एस्सार ऑयल के शेयर में पिछले चार कारोबारी सत्रों में ही 50% तक बढ़त आ गयी थी। बीएसई में इसका 9 जून का बंद भाव जहाँ 100.60 रुपये था, वहीं कल सोमवार 15 जून को यह 153.80 रुपये के ऊपरी स्तर तक चला गया। कल के बंद भाव 146.45 रुपये की तुलना में आज सुबह यह शेयर 149.40 रुपये पर खुला। लेकिन सुबह से ही इसमें कमजोरी आने लगी। कंपनी की ओर से एक्सचेंजों को स्पष्टीकरण भेजे जाने के बाद इसकी गिरावट और तीखी हो गयी। इस बिकवाली में यह 135.85 रुपये तक फिसल गया, जहाँ यह 7.24% नीचे था। हालाँकि बाद में यह निचले स्तरों से सँभला। अंत में यह 3.00 रुपये या 2.05% की गिरावट के साथ 143.45 रुपये पर बंद हुआ। (शेयर मंथन, 16 जून 2015)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख