शेयर मंथन में खोजें

निफ्टी (Nifty) गिर कर 5851 पर, सेंसेक्स (Sensex) 202 अंक टूटा

कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों की वजह से भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। 
निफ्टी (Nifty) 5900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ।
सेंसेक्स (Sensex) 202 अंक यानी 1.03% की तेज गिरावट के साथ 19,363 पर बंद हुआ। निफ्टी 63 अंक यानी 1.06% की गिरावट के साथ 5851 पर रहा। सीएनएक्स मिडकैप सूचकांक में 1.02% की गिरावट रही। बीएसई के मिडकैप सूचकांक में 1.00% और बीएसई स्मॉलकैप में 1.27% की गिरावट रही। आज के कारोबार में बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे ज्यादा बिकवाली का रुख रहा।  
नकारात्मक एशियाई संकेतों के बीच घरेलू बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। निफ्टी 5900 के स्तर से नीचे खुला। शुरुआती कारोबार में बाजार में एक सीमित दायरे में कारोबार होता रहा। कमजोर यूरोपीय संकेतों की वजह से बाजार पर दबाव पड़ा। दोपहर के कारोबार में बाजार की गिरावट बढ़ी। दिन-भर बाजार में एक सीमित दायरे में गिरावट पर ही कारोबार होता रहा। कारोबार के आखिरी घंटों में बाजार टूटा। इस दौरान सेंसेक्स 19,339 पर और निफ्टी 5842 पर दिन के निचले स्तरों तक लुढ़क गये। आखिरकार सेंसेक्स-निफ्टी आज के कारोबार में अपने निम्न स्तरों के आसपास ही बंद हुए। 
क्षेत्रो के लिहाज से आज बैंकिंग क्षेत्र को सबसे ज्यादा 2.18% का घाटा हुआ। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.57%, ऑटो में 1.53%, पीएसयू में 1.41%, आईटी में 1.18%, धातु में 1.15%, टीईसीके और तेल-गैस दोनों में 1.08% की गिरावट रही। पावर में 0.92%, कैपिटल गुड्स में 0.85%, रियल्टी में 0.63% और हेल्थकेयर में 0.19% की कमजोरी रही। दूसरी ओर, एफएमसीजी में 0.50% की बढ़त रही।  (शेयर मंथन, 13 मार्च 2013)     
 

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख